भोपाल: मध्यप्रदेश में जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के विकास को गति देने के लिए मोहन कैबिनेट ने नई कंपनी के गठन को मंजूरी दी है। जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड राज्य शासन के स्वामित्व में काम करेगी। सरकार शुरुआती अंश पूंजी के रूप में कंपनी को ₹100 करोड़ देगी। परियोजना का उद्देश्य औद्योगिक हब विकसित करना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
पहले चरण में 10 हजार एकड़ में बनेंगे 3 से 5 इंडस्ट्रियल हब
परियोजना के पहले चरण में 10 हजार एकड़ क्षेत्र में 3 से 5 प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित करने की योजना है। कैबिनेट में दिए गए प्रेजेंटेशन के मुताबिक, मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है। वहीं, अगले तीन वर्षों में ₹3 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 6 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित करने की योजना है।
निवेशकों को मिलेंगी एक ही जगह जरूरी सुविधाएं
औद्योगिक हब को प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यहां उद्योगों के लिए जमीन, बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा श्रमिकों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल, कौशल विकास केंद्र और हरित क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। नई कंपनी औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और निवेश आकर्षित करने पर काम करेगी, जबकि सड़क निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी।
सात जिलों में बढ़ेंगी औद्योगिक गतिविधियां
इस परियोजना से जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यटन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा एवं एयरोस्पेस, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, वेयरहाउसिंग, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशने की योजना है।
30 दिन में कंपनी, छह महीने में GIS मैपिंग
परियोजना की समयसीमा के अनुसार, अगले 30 दिनों में नई कंपनी का गठन किया जाएगा। छह महीने में पूरे कॉरिडोर की GIS मैपिंग और लैंड बैंक तैयार करने की योजना है। एक साल में प्राथमिक औद्योगिक हब का मास्टर प्लान और डीपीआर तैयार कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। भूमि की उपलब्धता के लिए पहले सरकारी जमीन को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर निजी जमीन सहमति से खरीदने या नियमानुसार अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
कैबिनेट के अन्य फैसले
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में बिजली संकट पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं और एक-दो दिन में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा स्कूलों में परिवहन व्यवस्था मजबूत करने के लिए करीब ₹241 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला स्तर पर कलेक्टरों को सौंपने का निर्णय लिया गया है, ताकि विद्यार्थियों को परिवहन सुविधा बेहतर तरीके से उपलब्ध कराई जा सके।
