ग्वालियर: प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि बरसात के बाद सभी नहरों की सफाई एवं मरम्मत का कार्य अभियान के रूप में किया जाए। 15 दिवस के भीतर सभी नहरों की सफाई का कार्य हो और इसकी रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाए। मंत्री सिलावट ने ग्वालियर भ्रमण के दौरान मुरार सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए।जल संसाधन मंत्री सिलावट ने विभागीय समीक्षा के दौरान विभागीय योजनाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।जल संसाधन मंत्री सिलावट ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश भर के डेढ़ लाख किसानों के अर्थदण्ड की 83 करोड़ रुपए की राशि माफ की है।
जिन किसानों ने एक मुश्त राशि जमा की है उनकी अर्थदण्ड की राशि माफ की गई है। सिंचाई के लिये जिन किसानों को पानी दिया जाता है उनसे मात्र 150 रुपए प्रति हैक्टेयर प्रति वर्ष की राशि ली जाती है। इस राशि की वूसली भी किसानों से की जाना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया है कि नगरीय निकाय एवं नगर पालिकाओं को भी सिंचाई विभाग के माध्यम से पेयजल हेतु जो पानी दिया जाता है उसकी बकाया राशि की वसूली के लिये भी पत्र लिखा जाए। वसूली कार्य को विभागीय अधिकारी प्राथमिकता से करें।
जल संसाधन मंत्री सिलावट ने विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया है कि सिंचाई के लिये पानी छोड़ने से पहले संबंधित क्षेत्र के किसानों के साथ भी संवाद किया जाए। चौपाल आयोजित कर किसानों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को भी इसकी जानकारी अनिवार्यत: दी जाए। सिलावट ने विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया है कि ग्वालियर चंबल संभाग के सभी डैमों व तालाबों की निरंतर मॉनीटरिंग की जाए। कहीं पर भी मरम्मत की आवश्यकता हो तो विभागीय स्तर से तत्परता से कार्य कराया जाए।
बैठक में बताया गया कि ग्वालियर चंबल संभाग में सिंचाई विभाग के माध्यम से लगभग 5 लाख 71 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिये पानी उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ ही विभागीय 91 तालाबों के माध्यम से भी किसानों को पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ग्वालियर व चंबल क्षेत्र के सभी जलाशय वर्तमान में पूरी क्षमता के साथ भरे हुए हैं।
