इंदौर: शहर में खाद्य और औषधि द्वारा स्थापित 8.50 करोड़ लागत से तैयार लैब में अभी तक जांच कार्य शुरू नहीं हो सका है. एक साल पहले शहर में मुख्यमंत्री ने नकली और मिलावट वाली वस्तुओं की जांच करने के लिए निर्मित प्रयोगशाला का शुभारंभ किया था. एक साल बीतने के बाद भी केंद्र के एनएबीएल द्वारा अनुमति नहीं दी गई. इस वजह से इंदौर में खाद्य प्रदार्थों के नमूने आज भी जांच रिपोर्ट के लिए भोपाल भेजे जा रहे है.
खाद्य और औषधि प्रदार्थों की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में नई प्रयोगशाला बनाने का निर्णय लिया था. इसके पीछे राज्य सरकार का उद्देश्य यह था कि खाद्य और औषधियों में मिलावट और नकली प्रदार्थों की जांच समय पर और जल्दी हो सके, ताकि मिलावटखोरों पर कारवाई कर लगाम लगाई जा सके. उक्त उद्देश्य को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार ने इंदौर के देवास रोड पर स्थित गांव तलावली चांदा में 8.50 करोड़ रुपए की लागत से साढ़े तीन हजार वर्गफुट पर बड़ी प्रयोगशाला का निर्माण किया था. उक्त प्रयोगशाला भवन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 अक्टूबर 2025 को किया था. बताया जाता है कि प्रयोगशाला में जांच करने एवं रिपोर्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार के एनएबीएल (राष्ट्रीय मानवीकृत बोर्ड लिमिटेड ) द्वारा अभी तक अनुमति जारी नहीं की गई है.
स्थिति यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग को नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थ के नमूने भोपाल स्थित प्रयोगशाला में जांच एवं रिपोर्ट के लिए भेजना पढ़ रहे हैं. इतना नहीं भोपाल से रिपोर्ट आने में 15 दिन का समय लग रहा है, जिससे मुख्यमंत्री की नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थ पर रोक लगाने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है. ॉइंदौर स्थित प्रयोगशाला में एक साल बीतने के बाद भी जांच एवं रिपोर्ट बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है. विभागीय सूत्रों ने अप्रैल अंत तक नमूनों के जांच कार्य शुरू होने की संभावना जताई थी, लेकिन अक्टूबर खत्म होने को आया है, अभी तक केंद्र सरकार द्वारा प्रयोगशाला का गजट नोटिफिकेशन नहीं किया गया है. गजट नोटिफिकेशन के बाद ही अनुमति जारी होगी. खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने कहा कि अनुमति देने की प्रोसेस चल रही है. जल्दी ही इंदौर में खाद्य और औषधिय सामग्रियों की जांच करना शुरू हो जाएगा.
लैब शुरू होती तो चार दिन में मिलती रिपोर्ट
यदि इंदौर में खाद्य और औषधि विभाग की परीक्षण शाला शुरू हो जाती, तो जांच रिपोर्ट तीन से चार दिन में मिल सकती है। अभी भोपाल से 15 से 20 दिन में जांच रिपोर्ट मिलती है। इस तरह समय की बचत और ज्यादा सैंपल की जांच भी हो सकती हैं। इतना ही नहीं जांच के सैंपल भी ज्यादा सुरक्षित तरीके से रखे जा सकते हैं और विभिन्न स्तर पर परीक्षण करने दिन ओर समय कम लगता। इस त्यौहार के सीजन में मिलावटी खाद्य सामग्रियों के खिलाफ कार्रवाई भी बढ़ जाती और जनता को सुरक्षित खाद्य प्रदार्थ उपलब्ध होने में आसानी रहती.
