खार्तुम, सूडान से एक बेहद दिल दहला देने वाली और मानवीय त्रासदी की खबर सामने आई है। सूडान और मिस्र की विवादित सीमा के पास एक सोने की खदान पर हुए अचानक हवाई हमले में कम से कम 72 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। सूडानी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स और इमरजेंसी लॉयर्स संगठन के अनुसार, हमलावर लड़ाकू विमानों ने खदान पर एक के बाद aक कई मिसाइलें दागीं। इस भीषण हमले में जान बचाने के लिए मौके पर मौजूद मजदूर इधर-उधर भागने लगे और अपनी जान बचाने के लिए नजदीकी पहाड़ों में जा छिपे। चश्मदीदों ने बताया कि एक फाइटर जेट ने अकेले खदान परिसर पर पांच बार बमबारी और फायरिंग की, जिससे वहां काम कर रहे सैकड़ों मजदूरों के बीच हाहाकार मच गया।
मलबे में अभी भी दबे हो सकते हैं कई लोग, भागते समय रास्ते में बिखरी मिली मजदूरों की लाशें और घायल
इस भयानक हमले में जिंदा बचे चश्मदीदों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया (AFP) को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि हमला इतना अचानक और भयानक था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। भागने के दौरान उन्होंने रास्ते में कई लोगों के शव बिखरे हुए देखे। स्थानीय संगठनों का मानना है कि खदान का मलबा ढहने और दूरदराज के रेगिस्तानी इलाके में फैले होने के कारण मृतकों का आधिकारिक आंकड़ा शुरुआती रिपोर्ट से कहीं अधिक हो सकता है। हमले के तुरंत बाद मजदूर अलग-अलग दिशाओं में अल-अंसारी गोल्ड मार्केट और सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे, जिससे वहां भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, मिस्र की सेना या सरकार की ओर से इस एयरस्ट्राइक पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सूडान और मिस्र के बीच सीमा विवाद का पुराना इतिहास, गृहयुद्ध से तबाह देश में अब तक 2 लाख से अधिक मौतें
उल्लेखनीय है कि सूडान और मिस्र के बीच खनिज संसाधनों से भरपूर ‘हलैब ट्रायंगल’ क्षेत्र को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। इससे पहले जून महीने में भी इसी तरह की सीमावर्ती खदान पर हुए हमले में 23 मजदूरों की जान गई थी, जिसका आरोप भी मिस्र की सेना पर लगा था। अफ्रीकी महाद्वीप का तीसरा सबसे बड़ा देश सूडान पहले से ही पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से देश की सेना (अब्देल फत्ताह अल-बुरहान के नेतृत्व में) और पैरामिलिट्री फोर्स ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) के बीच चल रहे खूनी गृहयुद्ध की मार झेल रहा है। इस आंतरिक संघर्ष और विदेशी हमलों की वजह से अब तक देश में 2 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिससे सूडान की मानवीय स्थिति बेहद दयनीय हो गई है।

