नागपुर, 11 अक्टूबर (वार्ता) कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रविवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है।
अपनी दादी के निधन के बाद घर लौटे श्री दिपके ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें उनके परिवार से बात करने की अनुमति नहीं दी गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ डराने-धमकाने की रणनीति अपनाई।
मीडिया से बातचीत करते हुए श्री दिपके ने दावा किया कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद पुलिस ने उन्हें उनके भाई या परिवार से फोन पर संपर्क नहीं करने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनकी दादी का निधन हुआ, तब भी उन्हें इस दुखद सूचना के बारे में तुरंत परिजनों से बात नहीं करने दी गई।
श्री दीपके के अनुसार, उन्होंने दिल्ली पुलिस से अनुरोध किया था कि वे केवल दो मिनट के लिए उनका मोबाइल फोन दे दें ताकि वे अपने भाई का नंबर तलाश सकें, लेकिन उन्हें यह सुविधा भी नहीं दी गई। अपनी गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए सीजेपी संस्थापक ने कहा कि उनके मामले में उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई बांड नहीं साइन किया है, जिसमें भविष्य में विरोध प्रदर्शन न करने की कोई शर्त हो।
श्री दिपके ने हुंकार भरी कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ‘तानाशाही’ के खिलाफ एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के लिए दिल्ली में रास्ते बंद किए गए और मेट्रो सेवाओं को बाधित किया गया। विमान के अंदर से अपनी गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए उन्होंने तंज कसा कि ऐसा बर्ताव किया जा रहा था मानो वे और अन्य प्रदर्शनकारी कोई आतंकवादी हों। प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज का हवाला देते हुए श्री दीपके ने दावा किया कि युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाकर पीटा जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस इसी तरह के आदेशों पर अमल करती रही, तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर असंतोष की आवाजों को दबाने का आरोप लगाया और दावा किया कि कदाचार के आरोपी पुलिसकर्मियों को पदोन्नति से नवाजा जा रहा है। महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए श्री दीपके ने दृढ़ संकल्प जताया कि वे गिरफ्तारियों से डरने वाले नहीं हैं और सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने दो टूक कहा, “चाहे मुझे सौ बार जेल में डाल दिया जाए, मैं आपकी तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करूंगा।”
