मुंबई, अमिताभ बच्चन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की थी। फिल्मों में आने से पहले वह कोलकाता की एक कंपनी में नौकरी करते थे।
- अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को प्रयागराज में हुआ था।
- अमिताभ बच्चन ने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढ़ाई की और स्कूल के नाटकों में हिस्सा लिया।
- कोलकाता में नौकरी के दौरान अमिताभ बच्चन की पहली सैलरी करीब 400 रुपये महीना थी।
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अपनी दमदार आवाज, शानदार अभिनय और दशकों लंबे करियर के लिए पहचाने जाते हैं। आज वह हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी। फिल्मों में आने से पहले अमिताभ बच्चन नौकरी करते थे और उनकी पहली सैलरी महज 400 रुपये बताई जाती है।
अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद, अब प्रयागराज, में हुआ था। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के मशहूर कवि थे, जबकि मां तेजी बच्चन की भी कला और नाटकों में रुचि थी। अमिताभ की शुरुआती पढ़ाई सेंट मैरीज कॉन्वेंट स्कूल में हुई। इसके बाद उन्हें नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढ़ने भेजा गया। शेरवुड कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अमिताभ की दिलचस्पी नाटकों में बढ़ने लगी। वह स्कूल के वार्षिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से हासिल की BSc की डिग्री
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अमिताभ बच्चन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने विज्ञान विषय में स्नातक यानी बीएससी की डिग्री हासिल की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमिताभ बचपन में इंजीनियर बनने या भारतीय वायु सेना में शामिल होने का सपना देखते थे। हालांकि, आगे चलकर उनकी राह फिल्मों की ओर मुड़ गई।
कोलकाता में 400 रुपये की नौकरी
पढ़ाई पूरी करने के बाद अमिताभ बच्चन नौकरी की तलाश में कोलकाता पहुंचे। यहां उन्होंने बर्ड एंड कंपनी नाम की शिपिंग फर्म में बिजनेस एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौरान उनकी मासिक सैलरी करीब 400 रुपये थी। सीमित कमाई के बीच वह कई अन्य लोगों के साथ छोटे से कमरे में रहते थे।
नौकरी छोड़कर चुनी फिल्मों की राह
अमिताभ बच्चन ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने के लिए नौकरी छोड़ने का फैसला किया। साल 1969 में उन्होंने फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से बतौर अभिनेता डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने अपने अभिनय से धीरे-धीरे दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। आगे चलकर ‘जंजीर’, ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का महानायक बना दिया।
