पति के जाने के बाद थामा ई-रिक्शा का हैंडल, सिलाई और मेहनत से संवार रहीं तीन बच्चों का भविष्य

शारदीय नवरात्रि में हम मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना कर शक्ति और संबल की कामना करते हैं. वहीं, इंदौर में कुछ महिलाएं अपने संघर्ष और हौसले से शक्ति का साक्षात उदाहरण पेश कर रही हैं. ‘नवभारत’ के विशेष अभियान ‘नवशक्ति को नमन’ के तहत आज हम आपको मिलवा रहे हैं नीलम देवी जी से, जिन्होंने मुश्किलों के आगे हार मानने के बजाय आत्मनिर्भरता की राह चुनी.

पति के असमय निधन के बाद नीलम देवी के सामने अपनी दो बेटियों और एक बेटे के पालन-पोषण और पढ़ाई की जिम्मेदारी आ गई. उन्होंने किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय खुद मेहनत कर बच्चों का भविष्य संवारने का संकल्प लिया.

दिन में ई-रिक्शा, रात में सिलाई
नीलम देवी दिनभर शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाकर सवारियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं. दिनभर की थकान के बाद रात में सिलाई मशीन संभालती हैं. ई-रिक्शा चलाने और कपड़ों की सिलाई से होने वाली कमाई से वे अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई का खर्च जुटाती हैं. नीलम देवी का सपना है कि उनके बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ जीवन जिएं. उनकी दोहरी मेहनत और अटूट हौसला साबित करता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, मां की ममता और मजबूत इरादे हर चुनौती का सामना कर सकते हैं.

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