नई दिल्ली, अक्टूबर महीने की शुरुआत इस बार सामान्य से काफी अलग और गर्म रही है, जहां देश भर में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) के 1 से 8 अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान देश में सामान्य से 69 प्रतिशत कम यानी केवल 8.9 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज हुई है, जबकि सामान्य बारिश 28.3 मिलीमीटर होती है। मानसून के पूरी तरह से जाने के बाद साफ आसमान, तेज सीधी धूप और सूखी हवाओं के चलते मध्य भारत समेत देश के करीब 18 राज्यों में ‘बहुत कम’ बारिश वाली स्थिति बनी हुई है। मौसम में आए इस बदलाव के कारण कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, जिससे अक्टूबर की शुरुआत में ही लोगों को कड़ाके की गर्मी का अहसास हो रहा है।
पश्चिम विक्षोभ के चलते उत्तर के पहाड़ी राज्यों में हल्की बारिश के आसार, दक्षिण और पूर्व में भी नमी का असर
देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाल मिला-जुला बना हुआ है। एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। वहीं, दूसरी तरफ दक्षिण से आ रही नम हवाओं के प्रभाव से तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी छिटपुट बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जिससे कुछ इलाकों में लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकती है।
किसानों के लिए चुनौती बना मौसम का रुख, गुजरात और महाराष्ट्र में सूखे व गर्म हालात रहने की संभावना
अक्टूबर के शुरुआती दिनों में मौसम का यह गर्म और शुष्क मिजाल किसानों के लिए एक तरफ जहां फसलों की कटाई की तैयारी करने वालों के लिए मददगार साबित हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह चिंता का विषय भी बनता जा रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई हिस्सों में मौसम पूरी तरह सूखा और गर्म बना हुआ है। मौसम विभाग ने कोंकण, गोवा और तटीय इलाकों के लिए गर्मी व नमी का येलो अलर्ट जारी किया है। जानकारों का मानना है कि जब तक कोई बड़ा मौसमी बदलाव या मजबूत प्रणाली सक्रिय नहीं होती, तब तक देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक ही बना रहेगा।

