श्रीनगर, 07 अक्टूबर (वार्ता) लद्दाख ने भारत की पहली उच्च हिमालयी वन्यजीव सफारी शुरू की है, जिसके तहत पर्यटकों को हिम तेंदुओं के प्राकृतिक आवास और क्षेत्र की विशिष्ट वन्यजीव संपदा देखने का अवसर मिलेगा।
इस पहल का उद्देश्य जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ संरक्षण और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करना है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख स्नो लेपर्ड सफारी के छह वाहनों को रवाना कर इस पहल की शुरुआत की। इसका संचालन स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर कंजर्वेशन (शान) सोसायटी द्वारा लद्दाख के वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग के सहयोग से किया जा रहा है।
एक आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, लद्दाख में वन्यजीव सफारी शुरू करने की घोषणा पांच अगस्त को की गयी थी और केवल दो महीने में इसे लागू कर दिया गया। शुरुआत में वाहन रुम्बक, शांग और उलेय जैसे चिन्हित क्षेत्रों में संचालित होंगे, जहां हिम तेंदुओं को अक्सर देखा जाता है। इसके लिए विशेष रूप से तैयार खुले वाहनों, प्रशिक्षित स्थानीय चालकों और वन्यजीव गाइडों की व्यवस्था की गयी है। आगे हेमिस राष्ट्रीय उद्यान, चांगथांग और काराकोरम वन्यजीव अभयारण्य के अलावा नुब्रा, जांस्कर, शाम, कारगिल और द्रास क्षेत्रों में भी उपयुक्त मार्ग चिन्हित किये जायेंगे।
अधिकारियों के अनुसार निर्देशित सफारी का उद्देश्य अवैध ऑफ-रोडिंग और वन्यजीवों को परेशान करने की घटनाओं को रोकना तथा पर्यावरण अनुकूल और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है। नियंत्रित संख्या में पर्यटकों, निर्धारित मार्गों और प्रशिक्षित स्थानीय कर्मियों के माध्यम से वन्यजीवों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जायेगा।
श्री सक्सेना ने कहा कि यह पहल केवल पर्यटन बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि वन्यजीव पर्यटन को जिम्मेदार, नियंत्रित और संरक्षण के अनुकूल बनाने के लिए है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की रक्षा लोगों की कीमत पर और विकास की कीमत पर वन्यजीवों की रक्षा नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसा मॉडल बनाया जाना चाहिए जिसमें दोनों साथ आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा कि हिम तेंदुए को देखने से होने वाली स्थानीय गाइड की आय, संरक्षण से जुड़े हस्तशिल्प से महिलाओं को मिलने वाला रोजगार और आर्द्रभूमि की रक्षा से गांवों को होने वाला लाभ ऐसे उदाहरण हैं, जिनसे संरक्षण आर्थिक अवसर में बदल सकता है।
लद्दाख में देश की सबसे बड़ी हिम तेंदुआ आबादी है। यहां अनुमानित 718 की राष्ट्रीय आबादी में से 477 हिम तेंदुए पाये जाते हैं। क्षेत्र में 38 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां, 340 से अधिक पक्षी प्रजातियां और करीब 1,800 संवहनी पौधों की प्रजातियां भी मौजूद हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि इस प्राकृतिक विरासत का संरक्षण लद्दाख की पारिस्थितिक सुरक्षा, स्थानीय आजीविका और भविष्य की अर्थव्यवस्था में निवेश है।
