उपभोक्ता आयोग के फैसले से कम्पनी को झटका

सीधी:जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग सीधी ने एल.जी. इलेक्ट्रानिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पीड़ित एलईडी टीव्ही उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति देने का आदेश किया है। उपभोक्ता आयोग के फैसले से एल.जी. कंपनी को बड़ा झटका लगा है।परिवादी के अधिवक्ता अटल मिश्रा की सटीक कानूनी दलीलों, गहन अध्ययन और असरदार पैरवी के बल पर आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता को अनुचित रूप से ली गई 85393 रूपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए और 10000 रूपये की मानसिक क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय भी प्रदान करे। दरअसल सीधी के वार्ड क्रमांक 9 दक्षिण करौदिया निवासी अच्युत मिश्रा ने 14 अगस्त 2023 को रीवा स्थित एस.जी. इलेक्ट्रॉनिक्स से 118000 रूपये में एल.जी. कंपनी का 75-इंच एलईडी टीवी मॉडल-75 यूआर 8040 पीएसबी खरीदा था। खरीदने के कुछ ही महीनों बाद
7 मार्च 2024 को टीवी की स्क्रीन में अचानक लाइनें आ गई और वह बंद हो गया। परिवादी को आश्वासन दिया गया कि टीवी इंश्योरेंस से कवर है और मरम्मत बदलाव की प्रक्रिया में बीमा कंपनी द्वारा क्लेम सेटल कर दिया जाएगा।कंपनी और सर्विस सेंटर के कहने पर परिवादी ने 30 सितम्बर 2024 को एल.जी. कंपनी के खाते में 85393 का भुगतान कर दिया। कंपनी ने ग्राहक को पुराना टीवी मॉडल बंद होने के कारण नया टीवी तो उपलब्ध करा दिया लेकिन ग्राहक द्वारा जमा की गई 85393 की राशि यह कहकर वापस नहीं की कि बीमा कंपनी चोला मण्डलम एमएस से क्लेम पास होने के बाद पैसे खाते में आ जाएंगे। हालांकि बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम निरस्त कर दिया कि ग्राहक की ओर से आवश्यक दस्तावेज नहीं मिले। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अटल मिश्रा और विजय गौतम ने दस्तावेजों का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए आयोग के सामने प्रमुख कानूनी तथ्य रखे।

उपभोक्ता आयोग का आदेश

अधिवक्ता अटल मिश्रा के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों से पूर्णतः सहमत होते हुए जिला आयोग के अध्यक्ष सुदीप कुमार श्रीवास्तव तथा सदस्य अल्पना मिश्रा एवं विभा पाण्डेय की पीठ ने फैसला सुनाया कि एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स परिवादी को 85393 रूपये की राशि परिवाद दायर करने की तिथि 19.05.2025 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। परिवादी को हुए मानसिक कष्ट और कानूनी खर्च के रूप में 10000 की क्षतिपूर्ति राशि दी जाए। मामले में शामिल विक्रेता लोकल सर्विस सेंटर और बीमा कंपनी को राहत देते हुए उनके खिलाफ परिवाद निरस्त किया गया।

इनका कहना है

यह सिफ एक ग्राहक की नहीं बल्कि कंपनियों की मनमानी के खिलाफ हर उपभोक्ता की जीत है। एल. जी. कंपनी ने ग्राहक से 85393 रूपये अवैध रूप से लिए और बीमा का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भागती रही। आयोग ने हमारी दलीलों को मानकर 9 प्रतिशत ब्याज के साथ पैसे लौटाने और जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। कानून के दरवाजे हर उस उपभोक्ता के लिए खुले हैं जिसके साथ धोखाधड़ी हुई है

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