एक मोहर के फेर में फंसा ननि: 10 महीने से 5 हजार फाइलें अटकीं,100 करोड़ का भुगतान रुका

विजय शर्मा

भोपाल: नगर निगम में एक मोहर को लेकर चल रहे विवाद का असर अब करीब 100 करोड़ रुपए के भुगतान पर पड़ रहा है। पिछले 10 महीने से 5 हजार से ज्यादा फाइलें अटकी हैं। वजह यह है कि जांच शाखा भुगतान से पहले फाइलों पर ‘भुगतान के लिए स्वीकृत’ की मोहर जरूरी बता रही है, जबकि लेखा शाखा का कहना है कि उसके पास यह मोहर ही नहीं है। दोनों शाखाओं के बीच यह मामला सुलझ नहीं पाने से ठेकेदारों और सामान व सेवाएं देने वालों का भुगतान रुका हुआ है। कई लोगों को 8 से 10 महीने से बकाया नहीं मिला है। इसके कारण उन्होंने निगम को नया काम और सामान देना भी बंद कर दिया है।
जांच के बाद आगे बढ़ती थी फाइल
नगर निगम में भुगतान से पहले सभी फाइलों की जांच होती है। इसके बाद फाइलें लेखा शाखा को वापस भेज दी जाती थीं और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। अब जांच शाखा ने भुगतान के लिए भेजने से पहले ‘भुगतान के लिए स्वीकृत’ की मोहर अनिवार्य कर दी है। दूसरी ओर, लेखा शाखा का कहना है कि उसके पास लगाने के लिए ऐसी मोहर उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
भुगतान न होने से विकास कार्य प्रभावित
भुगतान में लगातार देरी का असर निगम के साथ काम करने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। सामान और सेवाएं देने वालों का कहना है कि लंबे समय से पैसा फंसा होने के कारण कारोबार में चलने वाली पूंजी की कमी हो गई है और कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। कई लोगों ने तय किया है कि पुराने बिलों का भुगतान होने तक वे निगम का कोई नया कार्य नहीं लेंगे। इससे निगम के लिए जरूरी सामान और सेवाएं हासिल करना भी मुश्किल हो सकता है।
समिति निर्णय लेगी, मुहर जरूरी या नहीं
मामले को सुलझाने के लिए निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने समिति गठित की है। समिति रुके हुए भुगतानों से जुड़ी फाइलों की जांच करेगी और सामान व सेवाएं देने वालों से भी बातचीत करेगी। समिति अपनी रिपोर्ट आयुक्त को सौंपेगी। इसके बाद तय होगा कि ‘भुगतान के लिए स्वीकृत’ की मोहर वास्तव में जरूरी है या नहीं और यदि जरूरी है तो इसे लगाने की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी।
भुगतान की देरी ने बढ़ाई परेशानी
एक ओर निगम में करोड़ों रुपए का भुगतान रुका है, दूसरी ओर कई सामान और सेवाएं देने वालों ने नया काम लेने से हाथ खींच लिया है। ऐसे में मामला सिर्फ बकाया भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर निगम के कामकाज पर भी पड़ सकता है।
इनका कहना है
इस तरह के मामलों में समय समय पर जांच की जाती रही है. विषय बड़ा है ऑफिस में चर्चा करना सही रहेगा.
मालती राय, महापौर

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