पुराना बस स्टैण्ड बंद होने पर गरमाई सियासत

सीधी। पुराना बस स्टैण्ड बंद होने पर सियासत गरमा गई है। जिला कांग्रेस कमेटी सीधी अध्यक्ष ने बस स्टैण्ड के फुटकर दुकानदारों के समर्थन में व्यापारियों से आगे आने की अपील की है।

शहर के पुराने बस स्टैण्ड से बसों का संचालन बंद कर सभी बसों को नए बस स्टैण्ड से संचालित करने के प्रशासनिक निर्णय ने वहां वर्षों से फुटपाथ पर छोटी-छोटी दुकानें लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले फुटकर व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पुराने बस स्टैण्ड की जगह पर माल निर्माण प्रस्तावित है लेकिन इस विकास योजना के बीच उन गरीब परिवारों के भविष्य की चिंता नहीं की गई जिनकी आजीविका इसी बस स्टैण्ड पर निर्भर थी। ज्ञान सिंह ने मांग की कि नए बस स्टैण्ड में छोटे-छोटे दुकानदारों के लिए व्यवस्थित दुकानों का निर्माण कराया जाए और उन्हें उचित एवं किफायती दरों पर पुराने बस स्टैण्ड के प्रभावित फुटकर व्यापारियों को उपलब्ध कराया जाए। इससे बस स्टैंड पर यात्रियों को भी जरूरी सामान और सेवाएं मिल सकेंगी तथा इन व्यापारियों को सम्मान जनक तरीके से अपना कारोबार दोबारा शुरू करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब तक दुकानों का निर्माण नहीं हो जाता तब तक जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन नए बस स्टैण्ड परिसर में इन व्यापारियों के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित कर अस्थायी रूप से दुकानें लगाने की अनुमति दें। प्रशासन उनके बैठने दुकान लगाने और कारोबार करने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि वे तत्काल अपनी आजीविका फिर से शुरू कर सकें।

फुटकर व्यापारियों की रोजी-रोटी छीनना विकास नही: ज्ञान

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने सीधी शहर के समस्त व्यापारियों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे पुराने बस स्टैण्ड के प्रभावित फुटकर व्यापारियों के समर्थन में आगे आएं। उन्होंने कहा कि ये छोटे दुकानदार भी इसी समाज और व्यापारिक समुदाय का हिस्सा हैं। आज उनके सामने रोजी-रोटी का संकट है इसलिए उन्हें अकेला छोडऩे के बजाय हरसंभव सहयोग देना चाहिए। उन्होंने व्यापारियों और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि वे इन फुटकर दुकानदारों को नए बस स्टैण्ड में वैकल्पिक स्थान दिलाने के लिए प्रशासन से संवाद करें और उनकी मदद के लिए सामूहिक प्रयास करें। माल का निर्माण हो, शहर का विस्तार हो और नई सुविधाएं विकसित हों लेकिन इसकी कीमत उन परिवारों को अपनी रोजी-रोटी गंवाकर नहीं चुकानी चाहिए।

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