नयी दिल्ली, 03 अक्टूबर (वार्ता) वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने माना है कि वायु सेना के पास मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लड़ाकू विमानों के साथ-साथ अधिकारियों और वायु सैनिकों की कमी है लेकिन यह चिंता की बात नहीं है और इन कमियों को पूरा करने के लिए बनाई गई रणनीति और योजनाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समय पर पूरी हो जाती हैं तो स्थिति काफी सुधर जाएगी।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने वायु सेना दिवस 8 अक्टूबर से पहले शनिवार को यहां वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह सही है कि वायु सेना के पास विमानों की कमी है और इससे ज्यादा जहाज चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्थिति विमानों की आपूर्ति के निर्धारित कार्यक्रम में निरंतर हो रही देरी के कारण उत्पन्न हुई है। स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाए जाने के विभिन्न कार्यक्रमों में देरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ये कार्यक्रम निर्धारित समय पर पूरे हो जाते हैं तो स्थिति में सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि वायु सेना को हर वर्ष कम से कम 35 से 40 लड़ाकू विमानों की जरूरत है और यदि ऐसा होता है तो स्थिति काफी सुधर सकती है।
उन्होंने कहा कि स्वदशी विमानों के बारे में सभी हितधारकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।उन्होंने लड़ाकू विमानों के सौदों में होने वाली देरी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन विमानों के समय पर मिलने की उम्मीद थी वह पूरी नहीं हो सकी। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि विमानों की कमी बड़ी चिंता का विषय नहीं है। लड़ाकू विमानों के इंजनों के लिए विदेश पर निर्भरता कम करने के लिए उन्होंने कहा कि इसके बारे में ठोस निर्णय लिए जाने की जरूरत है। फ्रांस के साथ बहुउद्दइेशीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) सौदे के बारे में उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे मौजूदा वित्त वर्ष में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
वायु सेना प्रमुख ने कहा कि वायु सेना को हर वर्ष 35 से 40 विमान मिलने चाहिए। चीन द्वारा पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान दिए जाने को उन्होंने चिंता का विषय करार दिया है।उन्होंने कहा कि यदि देश में ही बनाए जाने वाले उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एमका) के कार्यक्रम में देरी होती है तो दूसरे विकल्पों के बारे में सोचा जाना चाहिए। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि वायु सेना के लिए अलग से ड्रोन फोर्स बनाए जाने की जरूरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि वायु सेना के पास अभी लड़ाकू विमानों के करीब 30 स्क्वाड्रन हैं जबकि उसे कम से कम 42 स्क्वाड्रनों की जरूरत है।वायु सेना प्रमुख ने यह भी माना कि वायु सेना में अधिकारियों और वायुसैनिकों की कुछ कमी है लेकिन इसे पूरा करने की दिशा में भी कदम उठाए जाते हैं और यह एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने वायु सेना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया।
चीन के पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान देने की खबरों पर चिंता जताते हुए वायु सेना प्रमुख ने कहा कि मीडिया में यह भी आया है कि पाकिस्तान के पायलटों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है लेकिन भारतीय वायु सेना के पास इस स्थिति से निपटने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल एक विमान से नहीं जीता जाता इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि यह विमान रक्षा प्रणालियों के साथ कितनी मजबूती से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास पहले भी लड़ाकू विमान रहे हैं लेकिन वह कुछ नहीं कर पाया है। उल्लेखनीय है कि चीन पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान जे-35 देने जा रहा है। देश में ही बनाए जाने वाले पांचवीं पीढ़ी के विमान एमका को वायु सेना की जरूत बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि इसकी आपूर्ति में देरी होती है तो वायु सेना को दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रूस ने अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान एस- 57 को भारत को देने की पेशकश की है लेकिन इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। दुनिया के अलग अलग हिस्सों में हो रही लड़ाइयों में ड्रोन के बढते इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारतीय वायु सेना को इस फोर्स की अलग से जरूरत है। उन्होंने कहा कि इनका अलग से इस्तेमाल किये जाने के बजाए मौजूदा सैन्य ढ़ांचे और अन्य हथियारों के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह वायु सेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं है और वायु सेना इसका दशकों से इस्तेमाल कर रही है और अब इनका दायरा बढाया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें भी वायु सेना ने ड्रोन युद्ध का सामना किया।
फ्रांस से बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान राफेल की बहुप्रतीक्षित खरीद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सब कुछ निर्धारित योजना और कार्यक्रम के आधार पर होता है तो इस सौदे को इस वित्त वर्ष में अंतिम रूप दिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की बात कर रहा है। यह खरीद सरकार से सरकार के बीच खरीद प्रक्रिया के तहत हो रही है। अभी इस सौदे से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों तथा कीमतों को लेकर बातचीत चल रही है। यदि यह सौदा समय पर पूरा हो जाता है तो विमानों की कमी का सामना कर रही वायु सेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की संख्या कुछ बढ़ जाएगी। देश में ही बनाए जा रहे लड़ाकू विमानों के लिए विदेश से इंजन की आपूर्ति में देरी पर उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार को कुछ निर्णय लेना होगा । उन्होंने कहा कि स्वदेशी इंजन को लांच पैड बनाकर इस दिशा में आगे बढना होगा जिससे विदेशों पर निर्भरता कम हो।
उल्लेखनीय है कि स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान के लिए अमेरिकी कंपनी जी ई से ईंजन समय पर नहीं मिलने के कारण इन विमानों की आपूर्ति में देरी हो रही है। उन्होंने वायु सेना में एयरोस्पेस क्षमताओं को बढाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वायु सेना का पहले से ही एयरोस्पेस पर फोकस रहा है और अब इसका प्रशिक्षण भी बढाया जा रहा है। दुबईफ्लाई एयरलाइन के भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर वायु सेना प्रमुख ने कहा कि कैप्टन मच्छार ने जो किया वह असाधारण है और हम सबको इस पर गर्व है। उन्होंने कहा कि यह घटना इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एक सबक भी है।

