जबलपुर: एक बगिया मां के नाम योजना और मनरेगा कार्यों में कथित लापरवाही के आधार पर अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार शर्मा की संविदा सेवा समाप्त करने का आदेश हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता केके पांडे ने पक्ष रखा। मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सीधी ने 17 दिसंबर 2025 को सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि योजना के क्रियान्वयन में सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, उपयंत्री व सहायक यंत्री सहित कई स्तर के अधिकारियों की भूमिका होती है, इसके बावजूद पूरी जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर डाल दी गई।
कोर्ट ने पाया कि शर्मा ने 16 दिसंबर को कारण बताओ नोटिस के जवाब में पोर्टल डाउन रहने, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां लंबित होने तथा कार्य- विभाजन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य रखे थे। इसके बावजूद अगले ही दिन सेवा समाप्ति आदेश पारित कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि आरोपों पर आधारित कलंककारी सेवा समाप्ति में कर्मचारी के जवाब और बचाव पर वस्तुनिष्ठ विचार करना आवश्यक है। हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर का सेवा समाप्ति आदेश निरस्त करते हुए मामला कलेक्टर, सीधी को नए सिरे से विचार के लिए भेज दिया। शर्मा को दो सप्ताह में अपील प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। कलेक्टर को पूर्ण सुनवाई के बाद दो माह में कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा। पुनर्नियुक्ति और मध्यवर्ती मानदेय का प्रश्न नीति के अनुसार तय किया जाएगा।
