
नीमच। उम्र को पीछे छोड़ते हुए 83 वर्षीय अर्जुन सिंह जादौन ने उदयपुर-राजसमंद में आयोजित डब्ल्यूएफसी त्रिसागा ट्रायथलॉन में अपनी आयु वर्ग की 500 मीटर तैराकी स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं उनके पोते समीर सिंह जादौन ने 1.5 किलोमीटर तैराकी में अपनी आयु वर्ग में रजत पदक जीतकर परिवार की खेल परंपरा को आगे बढ़ाया। खास बात यह रही कि दादा-पोते ने एक ही प्रतियोगिता में पदक हासिल किए।
जादौन परिवार की तीन पीढिय़ां खेल और शारीरिक सक्रियता को जीवनशैली का हिस्सा बनाए हुए हैं। परिवार की खेल परंपरा में एक अनूठा पहलू यह भी है कि समीर सिंह जादौन अपने दादा अर्जुन सिंह जादौन को तैराकी का प्रशिक्षण देते हैं। जादौन एक्वेटिक्स क्लब से जुड़ा परिवार नियमित रूप से तैराकी का अभ्यास करता है और क्लब का संचालन भी समीर सिंह जादौन करते हैं।
83 वर्षीय अर्जुन सिंह नियमित अभ्यास के माध्यम से स्वयं को सक्रिय रखते हैं। प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल कर उन्होंने उम्र के साथ खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता के पहले दिन तैराकी स्पर्धा में दादा-पोते ने पदक हासिल किए। आगामी दो दिनों में 40 किलोमीटर साइकिल दौड़ और 10 किलोमीटर दौड़ की स्पर्धाएं होंगी, जिनमें परिवार की भागीदारी जारी रहेगी।
जादौन परिवार की खेल परंपरा कई पीढिय़ों से चली आ रही है। समीर सिंह जादौन के भाई नीमच के स्टार एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। उनके पिता गोपाल सिंह जादौन भी खिलाड़ी रहे हैं। वहीं माता संगीता जादौन प्रारंभिक स्तर पर बच्चों को तैराकी का प्रशिक्षण देती हैं। वे बच्चों को पानी से परिचित कराने, पानी का डर दूर करने और तैराकी की बुनियादी गतिविधियों के माध्यम से खेल के प्रति प्रेरित करती हैं।
स्विमफ्लाय परिवार से जुड़े प्रभु मूलचंदानी ने बताया कि जादौन परिवार का उदाहरण बताता है कि खेल और शारीरिक सक्रियता को जीवनशैली में शामिल करने का सकारात्मक प्रभाव कई पीढिय़ों तक दिखाई दे सकता है। 83 वर्ष की उम्र में अर्जुन सिंह का स्वर्ण और समीर सिंह का रजत पदक परिवार के साथ खेल जगत के लिए भी गौरव का विषय बना है।
