दमोह में 1933 में महात्मा गांधी ने रखी थी गुरुद्वारे की नींव

दमोह। आज 2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है और इस दिन को स्वच्छता दिवस के रूप में अब मनाया जाने लगा है। जिनकी जन्मदिन को देश भर में यादगार मनाया जा रहा है, वह महात्मा गांधी दमोह में 1933 में पहुंचे थे। शहर के गडऱयाऊ मोहल्ला में गुरुद्वारे की नींव रखी थी, इस गुरुद्वारे का संचालन वाल्मिक समाज के द्वारा किया जाता है। महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलनों के समय देश के कई राज्यों समेत मध्यप्रदेश का भी दौरा किया था। 1933 में बापू पहली बार दमोह आए थे। दमोह प्रवास के दौरान गांधीजी ने शहर के गडऱयाऊ मोहल्ले में गुरुद्वारे की स्थापना की थी जिसका एक शिलालेख वहां मौजूद है। गुरुद्वारे की देखरेख वाल्मीकि समाज द्वारा की जाती है।

बापू जिस समय दमोह आए थे तब उस समय की सबसे महंगी कार शेवरेले में उन्हें शहर का भ्रमण कराया गया था। बापू को गढ़ाकोटा से दमोह तक उसी कार से लाया गया था। वह कार दमोह के प्रतिष्ठित डॉक्टर दुआ की थी, उस समय कार को जगन्नाथ पटेरिया ने चलाया था। बापू ने दमोह पहुंचकर शहर के मोरगंज गल्ला मंडी में सभा की थी, जिसमें करीब 10 हजार लोग शामिल हुए थे। उसके बाद वह मलिन बस्ती वर्तमान में गडऱयाऊ मोहल्ला पहुंचे और वहां गुरुद्वारे की नींव रखी थी। महात्मा गांधी की इस यात्रा के बाद दमोह में पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा आंदोलन गौ-वध के विरोध में हुआ था, इसके बाद देश में महात्मा गांधी ने जितने भी आंदोलन चलाए उनमें दमोह जिले की भी बराबर की भागीदारी बनती रही।

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