नयी दिल्ली, एक अक्टूबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने गुरूवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के चार बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।
शीर्ष अदालत ने राहत देने के बजाय कलकत्ता उच्च न्यायालय को अपने समक्ष लंबित इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मामले की योग्यता और प्राथमिक तथ्यों पर विचार करने से परहेज किया। पीठ ने टिप्पणी की कि चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश से पार्टी के नाम और प्रतीक को फ्रीज कर दिया है, और इस बात को लेकर बड़ा विवाद अभी भी अनसुलझा है कि पार्टी का कौन सा गुट पार्टी के नाम और प्रतीक का हकदार होगा और खातों की धनराशि का उपयोग कर सकेगा।
उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय से मामले का शीघ्र निपटारा करने का अनुरोध किया। इससे पहले 11 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा की गई उस अंतरिम व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसके तहत पार्टी के दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए कुछ खातों के संचालन की अनुमति दी गई थी।
वर्तमान अपील इंडियन बैंक के उन चार खातों से संबंधित थी जिनके संदर्भ में उच्च न्यायालय ने कोई राहत नहीं दी थी। ममता तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि खातों को फ्रीज किए जाने से पार्टी का कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि ये चार खाते, उन तीन एचडीएफसी बैंक खातों से अलग हैं जिन्हें प्रशासक की देखरेख में संचालित करने की अनुमति दी गई थी।
श्री सिंघवी ने कहा कि पार्टी को अपने कामकाज के लिए हर महीने लगभग 12.15 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है और केवल दैनिक खर्चों तक पहुंच को सीमित करना अपर्याप्त है, विशेषकर तब जब उपचुनाव नजदीक आ रहे हैं। दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पार्टी के भीतर आंतरिक विवाद का हवाला देते हुए तर्क दिया कि चुनाव आयोग को पहले प्रतिस्पर्धी दावों पर निर्णय लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कुछ खातों में 35 करोड़ रुपये के कथित नकद जमा से संबंधित जारी जांच का भी जिक्र किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने भी कहा कि दैनिक कामकाज के लिए आवश्यक खर्चों की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। हालांकि, श्री सिंघवी ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग की कार्रवाई पार्टी के नाम और प्रतीक से संबंधित है, न कि उसके बैंक खातों से। लेकिन पीठ इन दलीलों से असहमत रही और कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय को कार्यवाही में तेजी लाने का निर्देश दिया।
