महू/सिमरोल: महू तहसील की ग्राम पंचायत दतोदा में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. यहाँ 2 करोड़ 42 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रही 2.20 किलोमीटर लंबी सीमेंट-कांक्रीट सड़क निर्माण के दौरान ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. सड़क निर्माण में न तो फिनिशिंग का ध्यान रखा जा रहा है और न ही नियमों का पालन हो रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है.
योजना के मुताबिक इस मुख्य मार्ग को 35 फीट चौड़ा बनाया जाना था. निर्माण कार्य शुरू होने से पहले स्थानीय पंचायत ने सड़क के केंद्र से दोनों तरफ 18-18 फीट पर चूने के निशान भी लगाए थे ताकि मार्ग पूरी चौड़ाई के साथ बन सके. लेकिन ठेकेदार ने इन तमाम पैमानों को ताक पर रख दिया. ठेकेदार ने अपनी मनमानी करते हुए सड़क पर जहाँ जितनी जगह मिली, वहीं उतनी ही चौड़ाई में सीसी रोड बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी. इसके अलावा नियमों के मुताबिक सड़क के दोनों ओर 2-2 मीटर के शोल्डर भरे जाने थे, लेकिन कई जगहों पर पक्की मुरम की जगह केवल मिट्टी भरकर खानापूर्ति कर दी गई है.
वहीं कुछ स्थानों पर अवैध अतिक्रमण होने के कारण शोल्डर भरने की जगह ही नहीं बची है. ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि कांक्रीट बिछाने के बाद तय मानदंडों के अनुसार सड़क की तरी पानी का छिड़काव बिल्कुल नहीं की गई. इसी लापरवाही का नतीजा है कि मात्र एक महीना पहले बने हिस्से से ही रेत और गिट्टी बाहर आने लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि कई वर्षों के इंतजार के बाद बन रही सड़क की यही स्थिति रही, तो यह जल्द ही पूरी तरह उखड़ जाएगी. करोड़ों की इस सड़क परियोजना में लोक निर्माण विभाग द्वारा नाली निर्माण को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है. घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने और कई जगहों पर पुराने ड्रेनेज पाइप न बदले जाने के कारण आने वाले दिनों में जलजमाव का भारी संकट खड़ा होना तय है.
इनका कहना है
सड़क निर्माण में जो भी गलत या गुणवत्ताहीन कार्य किया गया होगा, उसे पूरी तरह से सही कराया जाएगा. यदि काम बहुत ज्यादा खराब पाया गया, तो उसे उखाड़कर फेंक दिया जाएगा. मैं स्वयं मौके पर जाकर निर्माण कार्य का बारीकी से निरीक्षण करूँगा. शोल्डर सिर्फ पक्की मुरम से ही भरे जाएंगे और यदि मिट्टी का उपयोग मिला तो कड़ी कार्रवाई होगी. सड़क की पूरी चौड़ाई के लिए राजस्व विभाग को सीमांकन हेतु पत्र लिख दिया गया है, सीमांकन होते ही सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे.
– हरेंद्र जादौन, पीडब्ल्यूडी एसडीओ, इंदौर।
