ब्यावरा। मोहनपुरा बांध से ब्यावरा शहर की कालातीत पेयजल समस्या को दूर करने के लिए 4 टंकियों का निर्माण किया जा रहा है. जिनसे शहर में पेयजल प्रदाय किया जाएगा. लेकिन यह सपने को सच होता देखने के लिए दो वर्ष का इंतजार करना होगा. टंकियों के निर्माण की समय सीमा दो वर्ष निर्धारित की गई है. हालांकि यह तय समय सीमा में भी पूर्ण होगी या नहीं यह भविष्य में देखने वाली बात होगी. इस बार के ग्रीष्म काल में भी ब्यावरा वासियों को पेयजल संकट से दो चार होना होगा. नपा के इंजीनियर विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे 33 करोड़ के बजट में ही 4 पेयजल टंकियों
करीब 33 करोड़ रूपये की लागत की मोहनपुरा योजना में
बजट प्रस्तावित है नगरपालिका के पास 8 करोड़ रूपये अमृत जलम योजना के तहत आरक्षित रखे है. इसी आठ करोड़ से निर्माण एजेंसी को कार्य शुरू करना था. पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि नगरपालिका प्रयास कर संबंधित गुजरात की एजेंसी से योजना में तीन प्रस्तावित टंकियों का निर्माण सबसे पहले करा लेगी. एजेंसी द्वारा टंकी का निर्माण शुरू कर दिया गया है. उसके सरफेस ग्राउण्ड का कार्य अभी जारी है.
का निर्माण होना है.
उल्लेखनीय है कि ब्यावरा नगर की आबादी और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए नगर को कम से कम चार नई टंकी बनाए जाने की आवश्यकता है. नगरपालिका को मिली मोहनपुरा पेयजल योजना में तीन नई टंकी प्रस्तावित है लेकिन इनका काम शुरू नहीं होने से यह तय हो गया है कि अगली गर्मी में भी वे बनकर तैयार नहीं होगी. इससे यह कहना जल्दबाजी नहीं होगा कि अगले साल की गर्मी भी नागरिकों को कुछ इसी तरह प्यासा मारेगी.
इस आधार पर हम यह कह सकते है कि नगरवासियों को अगले वर्ष की गर्मी में भी जल संकट का सामना इसी प्रकार करना पड़ सकता है. नगर को वर्तमान में कुशलपुरा और घोड़ा पछाड़ दो पेयजल योजना से पानी मिल रहा है. अगर पानी के संग्रहण और वितरण की व्यवस्था पर नपा फौकस कर लेती तो शायद यह संभव हो सकता था कि मोहनपुरा पेयजल योजना का बाकि काम विलंब से हो भी तो जल संकट पर विराम लगने का आधार बन सकता था.
10 सालों से गुलाब शाह की बावड़ी वाली टंकी बनीं शोपीस
नगरपालिका द्वारा गुलाबशाह की बावड़ी के निकट बनाई गई टंकी का उपयोग लगभग 10 वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है. इस टंकी की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल, टंकी का टेस्टिंग के दौरान भष्ट हो जाने से यह टंकी नागरिकों के लिये जलसंकट में एक नासूर का काम कर रही है. नपा ने न तो इसे चालु की और न ही आज तक वह दुरूस्त हो पाई है. नपा का दावा है कि उक्त टंकी अब उपयोग लायक है लेकिन उसे भरने के लिये नपा अब इंटकवेल बनाने में लगी है. इंटकवेल बनकर कब तैयार होगा और कब टंकी भरायेगी और इससे नागरिकों को कब से सुविधा मिलने लगेगी यह कोई दावा करने को तैयार नहीं है. ऐसा लगता है जैसे नगरपालिका खुद इस टंकी का रक्षा करने के बहाने ढूंढ रही है. यहीं कारण है कि इसे भरने के प्रयासों में हीला हवाली चल रही है. इस पूरी उधेड़बुन से आम नागरिकों को जल संकट से जूझने को विवश होना पड़ रहा है.
4 पेयजल टंकियों का निर्माण किया जाना है. शहर के सभी मुख्य हिस्से और बायपास व अन्य जगहों पर बनीं पॉश कॉलोनियों को भी इसमें जोड़ा जाएगा इसके निर्माण को पूर्ण होने में 2 वर्ष का समय लगेगा इसके बाद विधिवत पेयजल संचालन होगा. संबंधित एजेंसी ने अपना काम शुरू कर दिया है.
रूपेश नेता, इंजीनियर नपा ब्यावरा
