नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बुधवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) के शीर्ष नेताओं की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा देश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना है। बैठक में विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के हालिया फैसलों और अंदरूनी मतभेदों पर चर्चा करते हुए सरकार के खिलाफ एक ठोस राजनीतिक और कानूनी रणनीति तैयार करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव शामिल नहीं हो रहे हैं, और उनकी पार्टी का प्रतिनिधित्व सांसद हरेंद्र मलिक तथा मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी कर रहे हैं।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में खड़गे ने कहा- सोची-समझी साजिश के तहत वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं नाम
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर बेहद तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पिछले 12 वर्षों से एक सोची-समझी साजिश के तहत देश की लोकतांत्रिक बुनियाद को लगातार खोखला कर रही है। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भाजपा की ‘कठपुतली’ करार देते हुए कहा कि सुनियोजित तरीके से मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जो भारतीय लोकतंत्र की मूल भावनाओं और सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रहना चाहिए और किसी भी नागरिक के मताधिकार का हनन नहीं होना चाहिए।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष का कड़ा रुख, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
वर्ष 2027 में देश के पांच राज्यों में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्षी दल अब पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं। इंडिया गठबंधन की इस उच्चस्तरीय बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया में आम जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग की कार्यशैली पर कड़ी नजर रखी जाए। विपक्षी नेता संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निष्पक्ष चुनाव संपन्न हों और किसी भी स्तर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन न हो सके।

