नयी दिल्ली, 29 सितंबर (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने जनसांख्यिकी को देश की अखंडता से जुड़ा मुद्दा बताया है।
श्री आंबेकर ने मंगलवार को यहां इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि विभाग द्वारा हरेन्द्र प्रताप की पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’ के विमोचन के मौके पर कहा कि असम के आंदोलन ने देश के सामने जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से रखा था। उन्होंने कहा कि उस समय असम से उठी आवाज को केवल एक राज्य की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में समझने की आवश्यकता थी। उन्होंने भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों में जनसंख्या और सामाजिक संरचना में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनसांख्यिकी का प्रश्न देश की सामाजिक संरचना और अखंडता से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने स्वतंत्रता से पहले और बाद की राजनीति में जनसंख्या संबंधी प्रश्नों पर हुए विमर्श का भी उल्लेख किया और कहा, “देश की डेमोग्राफी देश की अखंडता से जुड़ा हुआ मुद्दा है।”
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि देश में जनगणना और जनसंख्या संरचना को लेकर गंभीर विमर्श की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में हुए जनसांख्यिकीय बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन का व्यापक प्रभाव पड़ता है। उनके अनुसार, जनसांख्यिकीय बदलावों को समझने के लिए जनसंख्या के आंकड़ों का गंभीर अध्ययन आवश्यक है।
आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि जनसंख्या से जुड़े विषयों पर केवल अनुमान या धारणाओं के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर गंभीर विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसंख्या संबंधी बदलावों से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी भारत सरकार को है और इस दिशा में कार्य किया जा रहा है।
पिछड़ा वर्ग उप-वर्गीकरण जांच आयोग के सदस्य डॉ. जतिंदर कुमार बजाज ने जनसंख्या के दीर्घकालिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके सामाजिक और सभ्यतागत आयामों पर भी विचार आवश्यक है। उन्होंने जनसंख्या वृद्धि, प्रजनन दर और विभिन्न समुदायों की जनसंख्या संरचना में आए बदलावों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
लेखक हरेन्द्र प्रताप ने कहा कि पुस्तक में उन्होंने मुख्य रूप से जनसंख्या के आंकड़ों को प्रस्तुत किया है और इसे पांच खंडों में विभाजित किया गया है। उनके अनुसार, पुस्तक का उद्देश्य विभिन्न कालखंडों के जनसंख्या संबंधी आंकड़ों को सामने रखकर देश में हुए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को समझने का प्रयास करना है। उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न क्षेत्रों के जनसंख्या संबंधी बदलावों का उल्लेख करते हुए अपने विचार रखे।
इस पुस्तक को प्रकाशित करने वाले सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने कहा कि पुस्तक में जनगणना के आंकड़ों के माध्यम से देश में जनसंख्या की बदलती संरचना और उसके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि पुस्तक इस विषय को राष्ट्रीय संदर्भ में देखने का प्रयास करती है।
