हर प्राणी के प्रति प्रेम और दया का भाव सनातन धर्म का मूल मंत्र

उज्जैन। हर प्राणी के प्रति प्रेम और दया का भाव सनातन धर्म का मूल मंत्र है. प्रदर्शन और पाखंड आज सनातन धर्म के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है. आज श्रद्धालुओं का पर्यटक बन जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. सनातन धर्म मानव जाति के अस्तित्व की रक्षा, उसकी समुन्नति और उसके दर्शन के अनुरूप दिव्य की प्राप्ति का आधार स्तंभ है. सनातन धर्म जीवनशाला है जो हमें जीने की कला सिखाता है. सनातन सीमाओं से आबद्ध नहीं, अपितु सर्वकालिक और सर्वव्यापक है.

वर्तमान समय में सनातन धर्म के समक्ष चुनौतियां विषय पर महाश्वेता नगर में विचार संगोष्ठी में विद्वतजनों द्वारा ये विचार प्रगट किये गए. इस अवसर पर वरेण्य संस्कृत विद्वान डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी, प्रो. बाल कृष्ण शर्मा, श्री शिव चौरसिया, प्रो. शैलेन्द्र पाराशर, श्री पिलकेंद्र अरोरा, श्री प्रकाश व्यास आदि उपस्थित थे. अवसर था पूर्व संभाग आयुक्त एवं कुलपति डॉ. मोहन गुप्त के जन्मदिवस पर वरिष्ठजन सम्मान एवं संवाद दिवस कार्यक्रम. आयोजन जीवन उद्घोष समिति, उज्जैन द्वारा किया गया. कार्यक्रम में वरिष्ठ जनों का सम्मान उनके ही परिवार जनों द्वारा किया गया. वर्ष 2025-26 के लिए “श्रीमती वैजयंती गुप्ता वरिष्ठजन सम्मान” श्रीमती मंजू सिंह और “डॉ. अशोक गुप्ता चिकित्सा सेवा सम्मान” वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विमल गर्ग को प्रदान किया गया.

संगोष्ठी को प्रारंभिक स्वर देते हुए संस्कृत संस्थान दिल्ली के पूर्व कुलपति डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी ने कहा कि सनातन धर्म मानव जाति के अस्तित्व की रक्षा, उसकी सम्मुन्नति और उसके दर्शन के अनुरूप दिव्य की प्राप्ति का आधार स्तंभ है. उज्जयनी विद्वत परिषद के अध्यक्ष डॉ. मोहन गुप्त ने डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी को “महापंडित” के विरुद से अलंकृत किया.

पूर्व कुलपति संस्कृत विद्वान बाल कृष्ण शर्मा ने सनातन की व्याख्या करते हुए बताया कि सनातन दो शब्दों सदा और तन से मिलकर बना है, सन्धि होने पर यह सनातन हो जाता है, जिसका अर्थ है जो हर काल में हर स्थान पर उपस्थित होता है. उन्होंने मनुस्मृति, वाल्मीकि रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवदगीता आदि के विभिन्न प्रसंग द्वारा सनातन धर्म की विवेचना की. सत्य बोलें लेकिन प्रिय बोलें, अप्रिय सत्य न बोलें और प्रिय असत्य भी न बोलें. राम द्वारा पुत्र धर्म का पालन सनातन है, कृष्ण स्वयं सनातन स्वरुप हैं. एक राजा के लिए सनातन धर्म का अर्थ होता है लोक की रक्षा और प्रजा पालन. युधिष्ठिर ने अहिंसा, सत्य, अक्रोध और दान को सनातन बताया. वर्तमान समय में पग पग पर सनातन का उल्लंघन हो रहा है. मोबाइल नामक यंत्र ने हमें सनातन से कोसों दूर कर दिया है. आज सनातन धर्म का अर्थ पाखंड और प्रदर्शन हो गया है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. आज आचरण की शुद्धि और प्रदर्शन त्यागकर तत्व से सनातन को ग्रहण करने की आवश्यकता है.

पूर्व संभाग आयुक्त एवं कुलपति संस्कृत के वरेण्य विद्वान डॉ. मोहन गुप्त ने कहा कि सनातन धर्म हमारी आधारशिला है. आज धर्म के नाम पर जो दिखावा और पाखंड हो रहा है उसने सनातन धर्म का बहुत अहित किया है. सनातन धर्म एक देश, समाज, जाति, वर्ग का नहीं अपितु सारे विश्व है. जो समूचे विश्व का कल्याण करे वह सनातन है. जो सबको जोड़ता है वह सनातन है. विभेद और विखंडन पर आधारित तथाकथित धर्म कभी सनातन नहीं हो सकता. सनातन सीमाओं से आबद्ध नहीं है, अपितु सर्वकालिक और सर्व व्यापक है.

डॉ. शैलेन्द्र पाराशर ने कहा कि सनातन संस्कृति में सर्वाधिक महत्व मनुष्य को मनुष्य बनाने पर दिया गया है. आज सनातन धर्म के समक्ष सबसे बड़ौती यह है कि कतिपय व्यक्ति अथवा व्यक्ति समूह निहित स्वार्थ के लिए अलग-अलग धर्म की स्थापना कर रहे हैं और सनातन धर्म को अपने तरीके से परिभाषित कर रहे हैं.

शिव चौरसिया ने कहा कि सनातन धर्म वह है, जिसमें न केवल मनुष्य प्रजाति, जीव जंतु अपितु समूची प्रकृति का कल्याण एवं सेवा निहित होती है. उन्होंने बचपन का प्रसंग सुनाते हुए कहा जब हम नदी के किनारे जाते थे तब हमारी मां कहती थी, बेटा नदी में कंकर मत फेंको तुम्हें पाप लगेगा. हमारी सनातन संस्कृति नदी, पहाड़, पेड़ पौधों आदि समस्त प्रकृति के अवयवों को सम्मान देती है और उनका पूरा ध्यान रखती है. जो स्वार्थ से परे है वह सनातन है, जिसमें सर्व कल्याण निहित है वह सनातन है.

जीवन उद्घोष समिति के अध्यक्ष प्रकाश व्यास ने कहा कि सनातन धर्म जीवनशाला है जो हमें जीने की कला सिखाता है.

उन्होंने बताया कि जीवन उद्घोष समिति की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी तब से समिति निरंतर वरिष्ठ जन सेवा और गो सेवा के कार्य कर रही है. हमारी समिति का ध्येय वाक्य है “निवृति से प्रवृत्ति की ओर”. हमारी यात्रा सांसारिक निवृत्ति से आध्यात्मिक प्रगति की और है. समिति के संरक्षक डॉ. मोहन गुप्त ने अपना जन्मदिन वरिष्ठ सेवा और गौ सेवा के नाम समर्पित किया है, यह अनुकरणीय है.

ये वरिष्ठ जन हुए सम्मानित

कार्यक्रम में वरिष्ठजनों डॉ. एस एन पांडे आयुर्वेदाचार्य, प्रोफेसर राधा वल्लभ त्रिपाठी संस्कृत विद्वान, प्रो. विष्णु प्रसाद कचोले कवि, डॉ. चन्दर सोनाने जनसंपर्क विद लेखक एवं अनिल कुमार रावत पर्यावरण सेवी का उनके परिजनों एवं इष्ट मित्रों द्वारा शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया.

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, श्रीमती वैजयंती गुप्ता और अशोक गुप्ता के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पूजन के साथ हुआ. कार्यक्रम का संचालन श्री पिलकेंद्र अरोरा ने किया. स्वागत गीत श्रीमती राधा मित्तल ने प्रस्तुत किया. आभार प्रकाश व्यास ने माना. कार्यक्रम में डॉ. आर. ए. मुदगल, एस. के. दुबे, श्रीमती संगीता गुप्ता, श्रीमती छाया गुप्ता, उपेन्द्र गुप्ता,पंकज मित्तल आदि उपस्थित थे.

Next Post

ग्वालियर में निःशुल्क हृदय रोग परामर्श शिविर

Tue Sep 29 , 2026
ग्वालियर, ग्वालियर के महावीर भवन में 29 सितंबर को निःशुल्क हृदय रोग परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। पूज्य सिंध हिन्दू जनरल पंचायत ग्रेटर ग्वालियर और आर.जे.एन. अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल्स के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस शिविर में विशेषज्ञ हृदय रोग डॉक्टरों की टीम ने लोगों की जांच की और […]

You May Like