नई दिल्ली, भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सामरिक दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। ईरान ने ओमान की खाड़ी में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट को उसके दक्षिण-पूर्वी शहर जहेदान से जोड़ने वाली 730 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का काम पूरा होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस रेल लिंक के आगामी तीन से चार महीनों में पूरी तरह शुरू हो जाने की संभावना है। इस नए मार्ग के चालू होने से भारत के लिए अफगानिस्तान, मध्य एशिया के भू-आबद्ध (Landlocked) देशों और पूर्वी रूस तक सामानों की आवाजाही बेहद सुगम और तेज हो जाएगी, जिसके लिए भारत पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रयास कर रहा था।
पाकिस्तान को बाईपास करने में मिलेगी मदद, 33 स्टेशन और 39 सुरंगों से लैस है यह अत्याधुनिक रेल परियोजना
यह चाबहार-जहेदान रेलवे लिंक न सिर्फ व्यापारिक बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से भी भारत के लिए एक मास्टरस्ट्रोक साबित होने वाला है। ईरान का जहेदान शहर न केवल ईरान-अफगानिस्तान सीमा के करीब है, बल्कि यहीं से पाकिस्तान की सीमा भी सटी हुई है, जिसे बायपास करने के लिए भारत को इस प्रोजेक्ट का लंबे समय से इंतजार था। तकनीकी रूप से बेहद उन्नत इस 730 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर कुल 33 स्टेशन बनाए गए हैं, जो 39 सुरंगों और 201 पुलों को पार करते हुए गुजरती है। वर्तमान में ईरानी अधिकारी इस रेलवे लाइन की अंतिम सुरक्षा (सेफ्टी) जांच में जुटे हैं और सभी मानक मंजूरियां मिलते ही इस पर नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
अमेरिकी प्रतिबंधों और चुनौतियों के बीच ईरान ने पूरा किया प्रोजेक्ट, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हुई थी रणनीतिक चर्चा
खास बात यह है कि ईरान ने यह विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना ऐसे समय में पूरी की है, जब वह वैश्विक तनाव और प्रतिबंधों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इससे पहले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में भी चाबहार पोर्ट पर भारत के अधिकारों की सुरक्षा और इस प्रोजेक्ट के संचालन पर विस्तार से चर्चा हुई थी। अमेरिका के साथ चल रहे कूटनीतिक समीकरणों और प्रतिबंधों के बीच, जैसे ही चाबहार पोर्ट के संचालन से जुड़े औपचारिक अधिकार भारत को पूरी तरह मिलेंगे, यह रेल मार्ग भारत के दक्षिण और मध्य एशियाई व्यापार के नए द्वार खोल देगा।

