सीहोर। शहर की वर्षों पुरानी झांकी और अखाड़ों की परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी. देर रात से शुरू हुआ झांकियों और अखाड़ों का कारवां सुबह तक शहर की सड़कों से गुजरता रहा. मुख्य मार्ग पर दूर-दूर से पहुंचे लोगों ने परिवार के साथ सड़क किनारे खड़े होकर झांकियों का आनंद लिया. आकर्षक विद्युत सज्जा से सजी झांकियों और अखाड़ों के कलाकारों के हैरतअंगेज करतबों ने लोगों का मन मोह लिया.
नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर की पहल पर इस वर्ष 15 अखाड़ों और 11 झांकियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया. अटल चौराहे पर नपा की ओर से भव्य मंच बनाया गया था, जहां प्रत्येक झांकी और अखाड़े के उस्तादों को मंच पर बुलाकर शील्ड एवं प्रोत्साहन राशि देकर उन्हें सम्मानित किया गया.
चल समारोह में शामिल झांकियों में बरसाना की झांकी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. वहीं स्वच्छता का संदेश देने वाली झांकी दूसरे स्थान पर रही, जबकि राजू भदौरिया द्वारा प्रस्तुत मां गंगा की महिमा पर आधारित झांकी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया. इसके अलावा अन्य झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं. नपाध्यक्ष प्रिंस राठौर ने झांकियों के निर्माण में जुटे कलाकारों एवं अखाड़ों के सदस्यों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रत्येक को प्रोत्साहन राशि प्रदान की. इस पहल से आयोजन में शामिल झांकी समितियों और अखाड़ों में भी उत्साह नजर आया.
इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी मंच पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में नपाध्यक्ष प्रिंस राठौर और सभी पार्षदों द्वारा सहयोग किया जा रहा है. उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं. चल समारोह के मार्ग पर सड़क के दोनों ओर खेल-खिलौनों, खान-पान एवं अन्य सामग्री की दुकानें सजी रहीं. दूर-दराज से आए लोग अपनी जगह पर रातभर डटे रहे और झांकियों का इंतजार करते नजर आए. शहर में निकलीं आकर्षक और झिलमिलाती झांकियों के साथ अखाड़ों के कलाकारों ने अपने प्रदर्शन से लोगों का मनोरंजन किया। धार्मिक, सामाजिक और जनजागरूकता से जुड़े संदेशों पर आधारित झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया. आयोजन ने एक बार फिर वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया. सड़कों पर झांकियों और अखाड़ों का यह कारवां देर रात से सुबह का उजाला होने तक उत्सव और उल्लास का केंद्र बना रहा.
