कोलकाता, 26 सितंबर (वार्ता) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति के अपना परामर्श पूरा करने के तुरंत बाद राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू किया जायेगा।
श्री अधिकारी ने इसके साथ ही प्रस्तावित समान नागरिक कानून को अपनी सरकार के कानूनी एजेंडे के केंद्र में रख दिया है।
यहाँ नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित ‘राम-शरद कोठारी प्रतिभा सम्मान’ एवं स्मारक संध्या कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया है। आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है। इसमें तीन-चार महीने का समय लगेगा। यह कुछ सुनवाई आयोजित करेगा और उसके बाद, हम प्रतिबद्ध हैं कि पश्चिम बंगाल में तुरंत यूसीसी लागू किया जाएगा। यहाँ भी केवल एक ही कानून होगा।”
न्यायमूर्ति देसाई की अध्यक्षता वाले नौ सदस्यीय पैनल को प्रस्तावित यूसीसी ढांचे का परीक्षण करने का काम सौंपा गया है और यह अपनी सिफारिशें सौंपने से पहले हितधारकों के साथ परामर्श कर रहा है। पैनल से राज्य के सभी पांच मंडलों में जनता के विचार और सुझाव मांगने के लिए जनसुनवाई आयोजित करने की भी उम्मीद है। प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने सहित व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए नियमों का एक समान ढांचा प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि सरकार पैनल की सिफारिशों पर विचार करने के बाद राज्य विधानसभा में यह विधेयक लायेगी।
यूसीसी को एक समान कानूनी ढांचे पर अपने व्यापक जोर से जोड़ते हुए श्री अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार ने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय कानूनों को लागू किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि होल्डिंग स्टेशनों की स्थापना सहित अवैध घुसपैठियों से निपटने के लिए कदम उठाये गये हैं और स्कूलों एवं मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य कर दिया गया है।
दुर्गा पूजा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि यह त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाये, जिसमें पितृ पक्ष के दौरान पूजा पंडालों का उद्घाटन न करना और अष्टमी के दिन पूरे पश्चिम बंगाल में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने 20 जून को ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के रूप में मनाने के राज्य सरकार के फैसले का भी हवाला दिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले तथा राम-शरद कोठारी स्मृति संघ के सदस्य और संरक्षक उपस्थित थे।
