पोषण पुनर्वास केंद्र के जरिए हजारों बच्चों को मिला पोषण :पुरोहित 

बागली। बालिका पूर्वी के कुपोषण से मुक्त होने पर उसके परिवार में खुशी दिखाई दी जन्म के समय बालीका पूर्वी का वजन बहुत कम होने के साथ अस्वस्थ भी रही शासन के आदेश अनुसार गंभीर कुपोषित बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने हेतु 14 दिन तक बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र एनआर सी में भर्ती किया जाता है ।इसी के तहत पूर्वी पिता सुंदर लाल निवासी सेवनिया खुर्द 11 माह कमजोर होने पर उसे आंगनबाड़ी केंद्र पर ले गए वहां पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा जांच की गई जांच में कुपोषण की श्रेणी में आ रही थी ।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ललिता कर्मा द्वारा बच्ची को उसके परिजनों के साथ लेकर सिविल हॉस्पिटल बागली पहुंची वहां पर डॉक्टर अमित पुरोहित को दिखाया गया दिखाने पर उसकी जांच की गई जांच के दौरान बच्चों का वजन एम यू ए सी एवं वेट एवं हाइट कम होने के कारण कुपोषण की श्रेणी में पाई गई बच्चों को दिनांक 9 सितंबर 2026को एन आर सी में 14 दिन भर्ती किया गया बच्ची पूर्ण तरह स्वस्थ होने पर उसे दिनांक 23 सितंबर 2026 को डिस्चार्ज किया गया बच्ची को कुपोषण से मुक्त होने पर परिवार वालों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया गया डॉ अमित पुरोहित ने बताया कि अप्रैल 2026 से सितंबर मा 2026 तक बागली पुनर्वास केंद्र में 238 असमान्य बच्चों का उपचार किया गया लगभग सभी कुपोषित बच्चों में 14 दिन के अंदर 1 किलो से डेढ़ किलो तक वजन बढ़ाने के साथ पूर्ण स्वस्थ हो गए इन बच्चों में 126 लड़कियां रही और 112 लड़के रहे इसी प्रकार विगत 5 वर्षों में 1300 से अधिक कुपोषित बच्चे लाभान्वित हुए हैं।

साथ में बताया कि प्रसुती होने के बाद जब परिजन अपने-अपने बच्चों को घर ले जाते हैं, वहां पर इस प्रकार की शिकायत आती है, तो वह आंगनबाड़ी केंद्र पर संपर्क करते हैं ।वहां से बच्चे बागली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले आते हैं। यहां कुशल चिकित्सक प्रणाली से कुपोषित बच्चों का परीक्षण किया जाता है, और कुपोषित पाए जाने पर उन्हें 14 दिन तक गहन चिकित्सा के साथ-साथ कुशल चिकित्सक मार्गदर्शन में रखा जाता है। इस दौरान उनके आहार और आवश्यक रख रखाव का पूरा-पूरा ध्यान सात से अधिक लोगों की टीम 24 घंटे रखती है। बच्चों की माता भी 14 दिन तक पुनर्वास केंद्र पर ही रहती है ,उनकी खाने-पीने और रहने की व्यवस्था भी शासन की ओर से की जाती है। हाल ही में पिपलिया लोहार की सोनू की लड़की प्रिया जिसका वजन 5 किलो 400 ग्राम था उसे पुनर्वास केंद्र का लाभ मिला और 14 दिनों में 1100 ग्राम वजन उसका बढ़ गया और स्वस्थ हालत में उसकी छुट्टी की गई। जीण माता-पिता के बच्चे अब बड़े हो गए हैं वह स्वयं भी पुनर्वास केंद्र की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि यदि इस प्रकार की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था नहीं होती तो शायद उनके बच्चे बड़े नहीं हो पाए ना ही जीवित रह पाते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ही भी एम ओ डा. अमित नागर ने बताया कि शासन की स्वास्थ्य सेवा संबंधी बहुत सारी योजना ये चल रही है सभी का उद्देश्य यही है कि कोई भी व्यक्ति बीमारी के चलते परेशान ना हो सभी प्रकार की सुविधा बागली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध भी है ,जिसमें सभी प्रकार की प्रायोगिक जांच शामिल है। साथ में मेडिकल दवाइयां का स्टॉक भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है।

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