नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के ऐतिहासिक शहर वडनगर से उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक नगरी वाराणसी तक की यात्रा करने वाले ‘सेवा संकल्प यात्रियों’ के साथ वर्चुअल माध्यम से विशेष संवाद किया। इस दौरान पीएम मोदी ने यात्रियों की सेवा भावना और उनके समर्पण की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी यह पहल वास्तव में बेहद प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भावुकता से जुड़ते हुए कहा कि वडनगर उनकी जन्मभूमि है और काशी उनकी कर्मभूमि है, जहां उन्हें क्रमशः हाटकेश्वर महादेव और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने दोनों सांस्कृतिक नगरियों के बीच चलाए जा रहे इस बड़े सेवा अभियान के लिए सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
राजनीति और शासन से ऊपर है राष्ट्र-निर्माण का संकल्प, आयुष्मान जैसी योजनाओं का दिया उदाहरण
यात्रियों द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन मौसम और तमाम बदलावों के बावजूद जिस तरह से इस यात्रा को आगे बढ़ाया गया है, वह सेवा के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति, चुनाव और शासन-व्यवस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हमारा सबसे बड़ा और प्राथमिक उद्देश्य हमेशा ‘राष्ट्र-निर्माण’ होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब निस्वार्थ सेवा की भावना से कार्य किया जाता है, तो उससे आयुष्मान भारत जैसी जन-कल्याणकारी योजनाएं जन्म लेती हैं, जो सीधे तौर पर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती हैं।
साल 2047 के ‘विकसित भारत’ के विजन में देश के युवाओं की भूमिका को बताया सबसे महत्वपूर्ण
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने देश की युवा शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि आज के युवा न केवल ‘विकसित भारत’ के इस महाअभियान की मुख्य रीढ़ हैं, बल्कि वे ही इस स्वर्णिम भविष्य के सबसे बड़े लाभार्थी भी हैं। उन्होंने युवाओं से देश के विकास में अपनी सहभागिता को और अधिक मजबूत करने की अपील की। इस वर्चुअल संवाद से जुड़े यात्रियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन को अपने इस सफर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।

