
जबलपुर। यात्रियों और रेल कर्मचारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पश्चिम मध्य रेल ने स्टेशनों, रेलवे कॉलोनियों और चिकित्सालयों में जलापूर्ति व्यवस्था की सघन निगरानी शुरू की है। जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडल के 284 स्टेशनों पर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान एक माह में 9,850 नलों और वाटर बूथों की सफाई कराई गई, जबकि 1,086 पानी की टंकियों की सफाई तथा 130 स्थानों पर पाइपलाइन की मरम्मत या बदलाव किया गया। पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए 893 जल नमूने लिए गए, जिनमें से कोई भी नमूना अनुपयुक्त नहीं पाया गया। रेलवे में पेयजल की गुणवत्ता की तीन स्तरों पर नियमित जांच की जा रही है।
जल स्रोत से आपूर्ति के अंतिम छोर तक रोजाना अवशिष्ट क्लोरीन की जांच होती है। इसके अलावा ई-कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी जांचने के लिए बड़े स्टेशनों, कॉलोनियों और चिकित्सालयों में मासिक तथा छोटे स्टेशनों और कॉलोनियों में माह में दो बार बैक्टीरियोलॉजिकल जांच की जाती है। जल की रासायनिक गुणवत्ता की जांच प्रत्येक छह माह में और नए जल स्रोत शुरू होने पर भी की जाती है। पश्चिम मध्य रेल का कहना है कि जल स्रोतों, टंकियों, पाइपलाइनों और वाटर बूथों की नियमित सफाई व निगरानी के साथ गुणवत्ता में कमी मिलने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।
