पॉक्सो एक्ट के ग्राफ में बढ़ोत्तरी चिंताजनक: हाईकोर्ट

जबलपुर: हाईकोर्ट की तीनों पीठ में पॉक्सो एक्ट के तहत साढ़े 14 हजार से अधिक अपील लंबित होने पर चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने चिंता जाहिर की है। युगलपीठ ने पॉक्सो कानून के प्रावधानों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार डीई को निगरानी का दायित्व दिया गया है।
गौरतलब है कि अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि व्यापक प्रचार प्रसार नहीं होने कारण पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों में बढ़ोतरी हो रही है।एक्ट के तहत केन्द्र व राज्य सरकार को एक्ट के संबंध में व्याप्क करना है। जिससे किशोर व नव युवकों को एक्ट तक एक्ट के संबंध में जानकारी पहुंच सके। इसके अलावा हाईकोर्ट संज्ञान याचिका के रूप में भी मामले की सुनवाई कर रहा था। इसके अलावा एक अन्य याचिका भी दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बताया गया कि पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के संबंध में विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं।
याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट की तीनों बेंचों के समक्ष पाक्सो एक्ट के 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। जिसमें से अधिकांश मामलो में पीड़ित की उम्र 16 से 18 वर्ष और आरोपी की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है। कई आरोपी कम उम्र के हैं और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध के आरोप में जेल में हैं।
युगलपीठ ने अपने आदेश कहा है कि जागरूकता के लिए किए गए उपायों के बावजूद पॉक्सो अधिनियम के तहत मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। लंबित आपराधिक मामलों और अपीलों का शीघ्र निपटारा तभी प्रभावी ढंग से हो सकेगा, जब नए मामलों की संख्या को कानून के प्रभावी उपायों के जरिए नियंत्रित किया जा सके।
युगलपीठ ने हाईकोर्ट की कमेटी को पीएनडीटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की प्रगति तथा अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी का जिम्मा सौंपा है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कमेटी पॉक्सो मामलों की प्रगति की निगरानी करेगी और मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकेगी। कमेटी को मध्य प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का अधिकार भी होगा। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है दो याचिकाओ का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा है कि सिर्फ संज्ञान याचिका पर सुनवाई की जायेगी।

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