सीधी: जिला चिकित्सालय सीधी में स्वीकृत पद के अनुसार चिकित्सकोंं की पदस्थापना न होने से मरीजों का उपचार पूरी तरह से प्रभावित है। जिला चिकित्सालय में केवल सामान्य मरीजों का उपचार करने की व्यवस्था बनाई गई है। यदि मरीज की हालत गंभीर सामने आई तो उसे सीधे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रीवा रेफर कर चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।जिला चिकित्सालय में करोड़ों की जीवन रक्षक मशीनें शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई हैं। जिनका कोई उपयोग मरीजों की जान बचाने के लिए नहीं किया जाता। सभी कीमती मशीनें धूल खाती हुई कबाड़ में तब्दील हो रही हैं।
जिला चिकित्सालय सीधी में स्वीकृत चिकित्सकों के पद 60 हैं। जिनके विरुद्ध 37 पर ही पदस्थापना होने के कारण मरीजों की उपचार व्यवस्था लडखड़़ाई हुई है। अस्पताल में ट्रामा सेंटर और क्रिटिकल केयर यूनिट भी नहीं है। एक पक्ष में क्रिटिकल केयर सेंटर बनाया गया है किन्तु संसाधन व चिकित्सकों के अभाव में यहां ताला लटकता रहता है। जिसके चलते सडक़ हादसे के गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के पश्चात सीधे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रीवा रेफर कर दिया जाता है। मजबूरन यहां के मरीजों को जबलपुर, नागपुर, प्रयागराज, बनारस जाना पड़ता है।
बीते वर्ष से 100 बेड का एमसीएच विंग शुरू कर दिया गया है। जिसके कारण अस्पताल 400 प्लस बेड का हो गया है लेकिन बढ़े बेड के हिसाब से संसाधन नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। यानी 300 बेड के संसाधन व कर्मचारियों की स्वीकृति पर ही 400 प्लस बेड का अस्पताल चल रहा है। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ें और मरीजों को बिना भटकाव के समुचित उपचार मिले इसको लेकर जिम्मेदारों द्वारा पूरी तरह से निष्क्रियता प्रदर्शित की जा रही है। ऐसे में मरीजों को जिला अस्पताल आने के बाद समुचित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है।
औपचारिक बना एमसीएच विंग का संचालन
जिला अस्पताल में एमसीएच विंग का संचालन पूरी तरह से औपचारिकता में हो रहा है। कोरोना काल के बाद ह्रदय रोग के मरीज तेजी से बढ़े हैं। जिला अस्पताल में ह्रदय रोग जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। बीते वर्ष टीएमटी मशीन तो उपलब्ध करा दी गई थी लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में इसका संचालन ही नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल में अभी तक वेंटिलेटर व डिफिलेटर की सुविधा भी नहीं है। संसाधनों के नाम पर केवल 80 बेड व 100 साइड लॉकर उपलब्ध कराए गए हैं। जिला अस्पताल इस विंग का संचालन जुगाढ़ के संसाधन से कर रहा है।
इनका कहना है
जिला अस्पताल में चिकित्सा विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी सहित सभी श्रेणी के पद बड़ी संख्या में रिक्त पड़े हुए हैं। संसाधनों का भी काफी अभाव है। विषय विशेषज्ञ के पद रिक्त होने से जो मशीनरी है उसकी सुविधा भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है।
डॉ.दीपारानी इसरानी, सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय सीधी
