भोपाल। आज के दौर में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिफेंस सिस्टम और डेटा सेंटर जैसी तकनीकों के लिए सेमीकंडक्टर चिप बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। दुनिया भर में चिप निर्माण और उससे जुड़े कारोबार को रणनीतिक क्षेत्र माना जा रहा है। भारत भी इस क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में मध्य प्रदेश के लिए भी सेमीकंडक्टर सेक्टर एक नई औद्योगिक संभावना के रूप में सामने आया है।
*सेमीकंडक्टर क्या होता है?*
सरल भाषा में समझें तो सेमीकंडक्टर ऐसे पदार्थ होते हैं, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाने में किया जाता है। इन चिप्स की मदद से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में डेटा को प्रोसेस करने और अलग-अलग कार्यों को नियंत्रित करने जैसे काम होते हैं।
आज लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में किसी न किसी रूप में सेमीकंडक्टर तकनीक का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि चिप से जुड़ी मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन, पैकेजिंग और टेस्टिंग का क्षेत्र तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है।
*भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर जोर*
भारत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए Semicon India Programme शुरू किया है। इसके तहत चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अधिक मजबूत भूमिका दिलाना और देश में इससे जुड़े निवेश तथा तकनीकी क्षमता को बढ़ाना है।
*मध्य प्रदेश ने भी बनाई सेमीकंडक्टर पॉलिसी*
इसी दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने Semiconductor Policy 2025 लागू की है। इसके जरिए राज्य में सेमीकंडक्टर और उससे जुड़े क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने तथा जरूरी औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया गया है।
मध्य प्रदेश के लिए इस सेक्टर में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सिर्फ अंतिम उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सेमीकंडक्टर से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाश रहा है।
*इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में 6,200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव*
सेमीकंडक्टर सेक्टर में मध्य प्रदेश की संभावनाओं के बीच इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में 6,200 करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना चर्चा में है।
Paras Semiconductors और मध्य प्रदेश सरकार के बीच इस संबंध में MoU हुआ है। प्रस्ताव के तहत यहां OSAT यानी Outsourced Semiconductor Assembly and Test सुविधा विकसित करने की योजना है।
OSAT यूनिट में सेमीकंडक्टर चिप्स की असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण चरणों से जुड़े काम किए जाते हैं। प्रस्तावित परियोजना के लिए उज्जैन-इंदौर कॉरिडोर क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने की जानकारी भी सामने आई है।
*MP को क्या फायदा हो सकता है?*
अगर प्रस्तावित निवेश और इससे जुड़ी गतिविधियां जमीन पर आगे बढ़ती हैं, तो इसका असर सिर्फ एक औद्योगिक यूनिट तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।
सेमीकंडक्टर से जुड़े उद्योगों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, टेस्टिंग, सप्लाई चेन, तकनीकी प्रशिक्षण और कुशल मानव संसाधन की मांग भी बढ़ सकती है।
इससे प्रदेश में नए निवेश और रोजगार के अवसरों के लिए एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने की संभावना बन सकती है।
*क्या मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर हब बन जाएगा?*
फिलहाल मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब कहना जल्दबाजी होगी। राज्य में पॉलिसी लागू हो चुकी है और बड़े निवेश के प्रस्ताव सामने आए हैं, लेकिन किसी बड़े औद्योगिक इकोसिस्टम को तैयार होने में समय लगता है।
आने वाले वर्षों में प्रस्तावित परियोजनाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं और उनके साथ कितनी कंपनियां तथा सप्लाई-चेन उद्योग जुड़ते हैं, यही तय करेगा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में मध्य प्रदेश की भूमिका कितनी बड़ी बनती है।
फिलहाल इतना जरूर है कि सेमीकंडक्टर सेक्टर ने मध्य प्रदेश के लिए एक नई औद्योगिक संभावना का दरवाजा खोल दिया है।
