वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच-1बी वीजा से जुड़ा एक बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए इस पर 100,000 डॉलर की भारी-भरकम फीस लगाने के आदेश को एक और साल यानी 21 सितंबर 2027 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस नए कार्यकारी आदेश के तहत अमेरिकी कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी करने वाले नियोक्ताओं (एम्प्लॉयर) की कड़ी जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी वर्कफोर्स को प्राथमिकता देना और स्थानीय नागरिकों के रोजगार की रक्षा करना है, जिससे अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले विदेशी और खासकर भारतीय तकनीकी प्रोफेशनल्स की राहें और अधिक कठिन हो सकती हैं।
अमेरिकी एजेंसियों को दिए गए विशेष निर्देश, पिछले साल और भविष्य में होने वाली छंटनी के आंकड़ों की होगी गहन समीक्षा
व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस आदेश के तहत स्टेट, लेबर और होमलैंड सिक्योरिटी विभागों के सचिवों को यह जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि क्या किसी नियोक्ता ने हाल ही में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या भविष्य में ऐसी कोई योजना बना रहा है। लेबर सेक्रेटरी को इसके लिए 30 दिन की समय-सीमा दी गई है ताकि वे वेज एंड आवर डिवीजन के जरिए पहले जमा किए गए लेबर कंडीशन एप्लीकेशन (LCA) के डेटा की गहराई से समीक्षा कर सकें और यह तय कर सकें कि संबंधित कंपनियों के खिलाफ आगे क्या कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारतीय आईटी पेशेवरों और तकनीकी कंपनियों पर दिख सकता है असर, वीजा नियमों को और अधिक कड़ा बनाने की तैयारी
मूल रूप से 19 सितंबर 2025 को लागू की गई इस 100,000 डॉलर की फीस और सख्त नियमों के रिन्यू होने से उन तमाम भारतीय आईटी कंपनियों और प्रोफेशनल्स की चिंताएं बढ़ गई हैं जो एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर निर्भर हैं। हालांकि आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल छंटनी की घोषणा मात्र से किसी आवेदन को स्वतः खारिज नहीं किया जाएगा, लेकिन वीजा आवेदनों की प्रोसेसिंग के दौरान कॉमर्स और एजुकेशन विभागों से भी परामर्श लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की लागत में भारी वृद्धि होगी।

