सतना : शहर में नागरिकों को सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी जल प्रदाय योजना इन दिनों शहरवासियों के लिए भूलभुलैया साबित हो रही है. एक तरफ नगर निगम द्वारा शहर के नागरिकों से लगातार और नियमित रूप से भारी-भरकम जल कर वसूला जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहरवासियों को सही समय पर और पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. शहर के विभिन्न वार्डों में पानी की आपूर्ति को लेकर भारी भेदभाव भी देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर वीआईपी कॉलोनियों में लगभग आधा घंटे से लेकर एक घंटे तक पानी की सप्लाई की जा रही है. वहीं दूसरी ओर अन्य सामान्य वार्डों और बस्तियों में केवल दस से पंद्रह मिनट ही पानी दिया जा रहा है. इस प्रकार की असमान वितरण व्यवस्था के कारण आम जनता को जरूरत के मुताबिक पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और जनता में नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश भी व्याप्त है.
शहर की यह पूरी जलापूर्ति व्यवस्था तकनीकी रूप से तीन प्रमुख चरणों में बंटी हुई है.
पहले चरण में वाटर फिल्टर प्लांट से जल शोधन का कार्य किया जाता है. जो कच्चे पानी को शुद्ध करती हैं. जिसकी जिम्मेदारी कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास है. अगले चरण यानी स्काडा सिस्टम के ज़रिए टंकियों में पानी भेजने का कार्य करती है. इस वाटर फ़िल्टर प्लांट में रोजाना लगभग साठ लाख लीटर पानी को शुद्ध किया जाता है. लेकिन इसके बावजूद धरातल पर शहरवासियों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है.जो अपने आप में एक बड़ा सवालिया निशान है.
दूसरा चरण ऑटोमेशन और मॉनिटरिंग का है. जिसमें जलापूर्ति के आधुनिकीकरण और नियंत्रण की कमान स्काडा योकोगावा कंपनी को सौंपी गई है.यह कंपनी वाटर फ़िल्टर प्लांट से पानी को आगे बढ़ाकर नगर निगम की विभिन्न टंकियों को भरने का महत्वपूर्ण कार्य करती है.
तीसरा चरण ज़मीनी स्तर पर वितरण व्यवस्था का है, जिसमें वाल्व संचालन और मोहल्लों तक पानी पहुँचाने का पूरा जिम्मा नगर निगम के कर्मचारियों के जिम्मे है. नगर निगम के कर्मचारी अलग-अलग जगहों पर बनी टंकियों के पानी को नियंत्रित कर मोहल्लों तक सप्लाई करने का काम करते हैं.
सबसे बड़ी हैरानी यह है कि जब पानी की सप्लाई का जिम्मा इतने स्पष्ट रूप से तीन अलग-अलग चरणों और एजेंसियों के बीच बंटा हुआ है, उसके बाद भी शहरवासियों को समय पर और पर्याप्त पेयजल नहीं मिल पा रहा है. जिम्मेदारियों के इस त्रिकोणीय विभाजन के कारण अक्सर यह तय करना बेहद मुश्किल हो जाता है कि जलापूर्ति में आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा, लीकेज या पानी की कमी के लिए असल में जवाबदेह कौन है. स्थिति यह बन चुकी है कि एक तरफ संबंधित कंपनियां और नगर निगम अपने-अपने हिस्से का काम पूरी ईमानदारी और सही तरीके से होने का दावा करते हैं तो दूसरी तरफ हकीकत यह है कि शहर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है. स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि नगर निगम और प्रशासन को इस लचर व्यवस्था की जल्द से जल्द उच्चस्तरीय समीक्षा करे. ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहां खामी है और जलापूर्ति को पूरी तरह दुरुस्त कर आम जनता को इस बड़ी समस्या से राहत पहुंचाई जा सके.
कुछ क्षेत्रों में जल्द दूर होगी समस्या: राहुल
पिछले सप्ताह मोटर ख़राब हो जाने के कारण शहर में पानी की सप्लाई बाधित हुई थी, लेकिन अब नगर निगम द्वारा सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली गई हैं. वर्तमान में पानी की सप्लाई पूर्ण रूप से चालू कर दी गई है.
राहुल पटेल
कार्यालय यंत्री
