सीएसआईआर ने उद्योगों को चमड़ा कारखानों के कचरे के प्रसंस्करण, हरित सड़क निर्माण की प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (वार्ता) वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर ) ने बुधवार को यहां एक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम में चमड़ा कारखानों के कचरे से सिंथेटिक टेनिंग सामग्री निकालने और सड़क बनाने की हरित प्रौद्योगिकी उद्योगों को हस्तांतरित करने के लिए प्रस्तुत कीं।

इनका विकास सीएसआईआर की दो प्रयोगशालाओं क्रमश: केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान , चेन्नई और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली ने किया है।

सीएसआईआर मुख्यालय के शांतिस्वरूप भटनागर प्रेक्षागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसआईआर विभाग की सचिव और महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने की । कार्यक्रम में उपरोक्त दोनों प्रयोगशालाओं के निदेशक भी शामिल थे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकी समाधानों को औद्योगिक स्तर पर उपयोग में लाने तथा स्वस्थ विकास, पुनर्चक्रण आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, अपशिष्ट के उपयोग, सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने में अपनाये जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान , चेन्नई द्वारा विकसित तकनीकें टेनरी उद्योग (चमड़ा पकाने का काम) में बेसिक क्रोमियम सल्फेट के इस्तेमाल के बाद कचरे में बचे क्रोम (क्रोम सेविंग्स) को प्रोटीन-आधारित सिंथेटिक टेनिन बनाने में काम आती है। इस प्रौद्योगिकी से उद्देश्य चमड़ा उद्योग की एक महत्वपूर्ण अपशिष्ट प्रबंधन समस्या का समाधान करना है।

क्रोम सेविंग्स एक गैर-जैव अपघटनीय ठोस अपशिष्ट है, लेकिन इसमें मूल्यवान कॉलेजन प्रोटीन मौजूद होता है, जिसका अक्सर पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता। नयी तकनीक से इस कचरे से क्रोमियम मुक्त प्रोटीन हाइड्रॉलिसेट प्राप्त करती है और उसे एक्रेलिक, फेनोलिक – तथा मेलामाइन आधारित सिंथेटिक टेनिंन (सिनटैन) में परिवर्तित करती है। इन सिनटैन का दोबारा चमड़े की टैनिंग में उपयोग किया जा सकता है।

इस तकनीक का 100 से 200 किलोग्राम की पायलट परियोजनाओं में उपयोग किया जा चुका है और 1,500 किलोग्राम के व्यावसायिक पैमाने पर इसका सत्यापन किया गया है। इसे अपनाने से टैनिंग की प्रक्रिया में निकलने वाले उत्प्रवाह में कुल घुलित ठोस योगिकों में 50 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।

सीएसआईआर का कहना है कि यह पेटेंट प्राप्त तकनीक उद्योग स्तर पर सत्यापित की जा चुकी है और व्यावसायिक लाइसेंसिंग के लिए तैयार है।

केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान की एक अन्य तकनीक पिकलिंग अम्ल अपशिष्ट के स्वस्थ उपयोग पर केंद्रित है। यह अत्यधिक अम्लीय अपशिष्ट स्टील प्रसंस्करण के दौरान उत्पन्न होता है।इस प्रक्रिया के माध्यम से पिकलिंग अम्ल अपशिष्ट से लौह और क्लोराइड को पुनः प्राप्त किया जाता है और उन्हें रंग के ग्रेड के आयरन ऑक्साइड और अमोनियम क्लोराइड जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जाता है

सीएसआईआर की केंद्रीय सड़क अनुसंधान प्रयोगशाला ने उद्योग को हस्तांतरित करने के लिए दो तकनीकें प्रस्तुत कीं इनमें एक प्रौद्योगिकी क्लेरीविजोर है जिसे चार पहिया वाहन चालकों की आंखों पर रात में पड़ने वाली चौंधियाने वाली रोशनी की चमक को कम करने के लिए विकसित किया गया है, जिससे रात में वाहन चलाते समय सड़क सुरक्षा बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

इसी तरह संस्थान ने सड़कों पर गढ्ढे भरने के लिए ऑनसाइट मिश्रण विकसित किया है। यह सड़क पर बने गड्ढों को मौके पर ही भरने के लिए विकसित मिश्रण है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसका उद्देश्य सड़क की मरम्मत को अधिक सुविधाजनक और प्रभावी बनाना है।

 

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