हैंडओवर से पहले स्कूल भवन की लीपापोती शुरू

सिंगरौली : मोरवा वार्ड क्रमांक-1 के पेड़ताली क्षेत्र स्थित शासकीय हाईस्कूल देवरीडांड़ के नए भवन में निर्माण पूरा होने से पहले ही आई दरारों ने गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले माह 26 अगस्त को नवभारत ने भवन में आई दरारों और टूटते प्लास्टर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।अब खबर सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी ने भवन में मरम्मत और लीपापोती का काम शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त प्लास्टर को तोड़कर जाली लगाई जा रही है। इसके बाद दोबारा प्लास्टर और पुट्टी भरकर दीवारों को चिकना किया जा रहा है।

भवन के अंदर और बाहर दोनों हिस्सों में यह पैचिंग की जा रही है। दरारों को पहले खोलकर जाली और प्लास्टर से भरने के बाद ऊपर पुट्टी की परत चढ़ाई जा रही है। इससे भवन की दीवारें देखने में भले ही दुरुस्त नजर आने लगें, लेकिन असली सवाल दरारों की वजह और भवन की संरचनात्मक मजबूती को लेकर बना हुआ है। फिलहाल लाखों-करोड़ों रूपये की भवन में आए दरार के बाद किये जा रहे लीपापोती पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हुये इसकी जांच कराए जाने की मांग भी शुरू हो गई है।
करोड़ों के भवन पर निगरानी सवालों में
जानकारी के अनुसार स्कूल भवन का निर्माण एनसीएल के सीएसआर मद से कराया जा रहा है। भवन लगभग तैयार है, लेकिन अभी उसका हैंडओवर नहीं हुआ है। ऐसे में यह समय निर्माण की कमियां छिपाने के बजाय उनकी तकनीकी जांच कराने का है। एनसीएल के विभिन्न कार्यों में निर्माण गुणवत्ता और अनियमितताओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। देवरीडांड़ स्कूल भवन का मामला भी इसी सिलसिले में गंभीर सवाल खड़ा करता है। 26 अगस्त को यह मुद्दा सामने आने के बाद अब मरम्मत शुरू होना इस बात का संकेत है कि शिकायत और सवालों के बाद खामियों को दुरुस्त करने की कवायद तेज हुई है। हैंडओवर से पहले भवन की तकनीकी और संरचनात्मक मजबूती की स्वतंत्र जांच जरूरी है। विद्यार्थियों के उपयोग में आने वाले भवन में केवल प्लास्टर और पुट्टी की चमक नहीं, बल्कि वास्तविक मजबूती सुनिश्चित की जानी चाहिए। अन्यथा आज छिपाई गई दरारें भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती हैं।
पुट्टी से ढकी दरार,खत्म नहीं हुई समस्या
हैंडओवर से पहले ही भवन में दरारें आना सामान्य स्थिति नहीं मानी जा सकती। यदि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान रखा गया था, तो निर्माण पूरा होने से पहले दीवारों में दरारें और प्लास्टर टूटने की स्थिति क्यों बनी? यह जांच का विषय है। अब इन खामियों पर पुट्टी भरकर सतह को चिकना किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या पुट्टी भर देने मात्र से भवन टिकाऊ हो जाएगा, दरार के पीछे निर्माण सामग्री, प्लास्टर की गुणवत्ता, सतह की तैयारी या किसी संरचनात्मक कारण की भूमिका है अथवा नहीं, इसका पता तकनीकी जांच से ही चल सकता है। केवल दरार को ढक देने से उसकी मूल वजह समाप्त हो गई, यह मान लेना जल्दबाजी होगी।

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