जबलपुर। शहर के प्रतिष्ठित श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 36 लाख 81 हजार 730 रूपये का फीस घोटाला हुआ। संस्थान के ही एक भरोसेमंद अकाउंटेंट ने छात्रों के भविष्य और कॉलेज के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया है। आरोपी ने कॉलेज के नियमों को ताक पर रखकर छात्रों से लाखों रुपये की फीस नकद और अपने पर्सनल बैंक खाते में ऐंठ ली। माढ़ोताल पुलिस ने कॉलेज प्रबंधन की शिकायत पर धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी के प्राचार्य शैलेश गुप्ता (45) द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, चंद्रमोहन सिंह ठाकुर साल 2017 से कॉलेज में अकाउंटेंट (लेखाकार) के पद पर तैनात था। कॉलेज के नियमों के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी को नकद फीस लेने का अधिकार नहीं है, छात्रों को पूरी फीस सीधे कॉलेज के अधिकृत बैंक खाते में ही जमा करनी होती है। लेकिन, चंद्रमोहन ने इस व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कई छात्रों को झांसे में लिया। उसने नियमों के खिलाफ जाकर छात्रों से फीस की रकम या तो नकद ले ली या फिर अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में ट्रांसफर करवा ली। कॉलेज प्रबंधन को भनक न लगे, इसके लिए आरोपी ने छात्रों को फर्जी और कूटरचित रसीदें बनाकर दे दीं। यह पूरा फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब कॉलेज को छात्रों की तरफ से फीस और नो ड्यूज को लेकर शिकायतें मिलने लगीं। जब कॉलेज प्रशासन ने आंतरिक जांच की, तो पता चला कि शुरुआती तौर पर ही 14 छात्रों के साथ सीधे तौर पर यह धोखाधड़ी की गई थी। जैसे ही गड़बड़ी की बात बाहर आई, चंद्रमोहन सिंह ठाकुर जनवरी 2026 से ही कॉलेज से गायब हो गया। कॉलेज प्रबंधन ने जब उसके घर पर संपर्क साधने की कोशिश की, तो वह वहां भी नहीं मिला और उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। दस्तावेजी सबूतों के आधार पर 17 लाख 82 हजार 148 रुपये की हेराफेरी के पक्के सबूत मिले हैं। मौखिक शिकायतों के आधार पर 36 लाख 81 हजार 730 रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। गबन की रकम और बढ़ने की पूरी आशंका है। पुलिस ने कॉलेज के प्राचार्य द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और भुगतान प्रमाणों के आधार पर आरोपी चंद्रमोहन सिंह ठाकुर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
