सैनिटरी व्यापारी से 27 लाख की ठगी

जबलपुर:ईमेल स्पूफिंग के जरिए सैनिटरी व्यापारी को जालसाजों ने निशाना बनाते हुए 27,05,690 रुपये की चपत लगाई। ठगों ने व्यापारी के पुराने बिजनेस वेंडर की फर्जी ईमेल आईडी बनाकर बैंक खाता बदलने का झांसा दिया और पूरी रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली। पीडि़त की शिकायत पर गोरखपुर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है ।
पुलिस के मुताबिक, आदर्श नगर ग्वारीघाट निवासी महत चावला (22) मदनमहल स्थित गुरूवाणी बिल्डिंग में मेसर्स विजय सेल्स एंड सेनेटरीवेयर्स नाम की फर्म संचालित करते हैं। उनकी फर्म पिछले 16 वर्षों से इंदौर की एम.वी. पटेल एण्ड कम्पनी से जगुआर कंपनी के सैनिटरी उत्पाद खरीद रही है। दोनों फर्मों के बीच सालों से लेनदेन और पत्राचार ईमेल के माध्यम से ही होता आ रहा था, जिसका फायदा अपराधियों ने उठाया। पीडि़त को हूबहू वेंडर कंपनी जैसी दिखने वाली ईमेल आईडी से एक मेल मिला। इसमें दावा किया गया कि कंपनी ने अपना बैंक खाता बदल लिया है और अब आगामी सभी पेमेंट सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की महालक्ष्मी टॉवर शाखा के नए खाते में जमा किए जाएं। भरोसे को पक्का करने के लिए मेल के साथ जाली दस्तावेज भी संलग्न थे। पुराने व्यापारिक संबंधों के कारण पीडि़त ने बिना किसी संदेह के कुल 27,05,690 की रकम उस फर्जी खाते में ट्रांसफर कर दी।
लेजर स्टेटमेंट आते ही उड़े होश
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब अप्रैल का महीना खत्म होने पर असली वेंडर कंपनी ने पीडि़त को लेजर स्टेटमेंट भेजा। इस स्टेटमेंट में पीडि़त द्वारा भेजी गई 27 लाख रुपये की राशि का कोई रिकॉर्ड नहीं था। जब पीडि़त ने इंदौर फोन कर वेंडर से बात की, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है।
दोबारा आया मेल, तब खुला राज
जब शातिर ठग ने दोबारा एक मेल भेजकर बैंक खाते को सेविंग से करंट में बदलने के लिए कहा। इस बार संदेह होने पर पीडि़त ने जब कंपनी के मुख्य अधिकारियों से फोन पर सीधे बात की, तो कंपनी ने बताया कि उनका बैंक खाता कभी बदला ही नहीं गया। इसके बाद व्यापारी को समझ आया कि वे एक सोची- समझी साइबर साजिश का शिकार हो चुके हैं।

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