नई दिल्ली, अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को पारित कर दिया है, जिसमें 86 वोट पक्ष और 11 विरोध में पड़े। इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से ईंधन खरीदने वाले भारत और चीन जैसे शीर्ष आयातक देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी आयात शुल्क या कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिल सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया भारत का स्वतंत्र कूटनीतिक रुख
अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि लंबे समय से चल रहे इस भू-राजनीतिक संघर्ष का अंत किसी देश द्वारा तेल, कोयला या उर्वरक खरीदने अथवा न खरीदने के फैसले से नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय विवादों का एकमात्र और वास्तविक समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत, कूटनीति और दोनों पक्षों के बीच सीधी राजनीतिक चर्चा के माध्यम से ही संभव है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और ऊर्जा सुरक्षा पर संभावित प्रभाव
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजबूत संबंधों का हवाला देते हुए उम्मीद जताई है कि दोनों नेता कूटनीतिक स्तर पर इस टैरिफ विवाद को सुलझा लेंगे। हालांकि, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए घरेलू जरूरतों के अनुसार आयात जारी रखे हुए है, जबकि वाणिज्य मंत्रालय दोनों देशों के बीच प्रस्तावित बड़े व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर संपर्क में है।

