मुंबई, 31 अगस्त (वार्ता) अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने एकीकृत प्लेटफॉर्म वाले बुनियादी ढांचों के लिए नया क्रेडिट फ्रेमवर्क विकसित करने का आग्रह किया।
प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से एक केयरएज ग्रुप के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री अडानी ने कहा कि कई विश्लेषणात्मक फ्रेमवर्क उस समय विकसित किये गये थे जब बुनियादी ढांचों का विकास क्रमिक तरीके से होता था, मांग अधिक स्पष्ट दिखाई देती थी और परिसंपत्तियों का आंकलन अलग-अलग किया जा सकता था। अक्सर इसके लिए सिंगल-एसेट डिस्काउंटेड कैश-फ्लो मॉडल का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन देश का बुनियादी ढांचा परिदृश्य अब बदल चुका है और इसके साथ उसके आंकलन के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्रेमवर्क को भी बदलने की आवश्यकता है।
श्री अडानी ने कहा, “यदि हम केवल उस मांग के लिए निर्माण करेंगे जिसे हम आज देख सकते हैं, तो भारत हमेशा आने वाले अवसरों से चूक जायेगा।”
उन्होंने कहा कि केरल स्थित विझिंगम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह में भी इसका मूल्य केवल बंदरगाह की क्षमता तक सीमित नहीं है। दशकों तक भारत को अपने कंटेनर कार्गो की ट्रांसशिपमेंट के लिए सिंगापुर, दुबई और कोलंबो पर निर्भर रहना पड़ा, जिसका असर धन, समय और रणनीतिक स्वायत्तता पर पड़ा। पारंपरिक क्रेडिट मॉडल निष्पादन संबंधी जोखिम का सही आंकलन करते हैं, लेकिन रणनीतिक बुनियादी ढांचों के मामले में राष्ट्रीय मजबूती से मिलने वाले आर्थिक मूल्य को भी पहचानना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “रेटिंग फ्रेमवर्क अक्सर अलग-अलग परिसंपत्तियों का आकलन करते हैं। लेकिन हमें यह समझना होगा कि आज के दौर में वास्तविक मूल्य उस संगम पर पैदा हो रहा है, जहां ‘ऊर्जा, डाटा और मैन्युफैक्चरिंग’ का मेल होता है।”
अडानी समूह के चेयरमैन ने कहा कि प्रस्तावित केयरएज फ्रेमवर्क बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोसिस्टम मल्टीप्लायर और एडजेसेंसी वैल्यू का आकलन करेगा। यदि इसे भारत में विकसित किया जाता है, तो यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क बनने की क्षमता रखता है।
