अनूपपुर: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय में ऐसा निजी चिकित्सालय जहां बिना चिकित्सक के कर्मचारी ही चिकित्सक बने बैठे हैं और चिकित्सक के नाम पर कर्मचारी पर्ची लिखकर दवाई कर रहे हैं। इस दौरान एक महिला की मौत हो गई। जब मामला संज्ञान में आया तो स्वास्थ्य की नीद खुली और रविवार को आशीर्वाद अस्पताल का निरीक्षण किया गया जहां चिकित्सक की अनुपस्थिति में मरीजों का उपचार किए जाने सहित कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। इस दौरान पुलिस बल के साथ अन्य चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
जैतहरी रोड स्थित आशीर्वाद चिकित्सालय संचालित हैं जहां 2 दिन पूर्व उपचार के दौरान महिला की मौत हुई थी। जिसके बाद मामले को संज्ञान में लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलका तिवारी स्वास्थ्य विभाग की टीम निरीक्षण किया और जानकारी के अनुसार छिल्पा निवासी फुलमत चौधरी पति बिकनू की आशीर्वाद चिकित्सालय में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अलका तिवारी ने बताया कि गंभीर हालत में महिला को अस्पताल स्टाफ ने चिकित्सक की मौजूदगी के बिना ही भर्ती कर लिया। उपचार के दौरान लापरवाही के चलते उसकी मौत होने की बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू की है।
निरीक्षण में चार मरीज मिले भर्ती
रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया और भर्ती मरीजों की जानकारी ली। इस दौरान अस्पताल में चार मरीज भर्ती मिले। इनमें दो मरीज पूर्व से बिना चिकित्सक की मौजूदगी के उपचाररत थे , इसके साथ ही दो मरीज जो की सामान्य बीमारी से ग्रसित थे उन्हें रविवार को ही भर्ती किया गया था। जांच में सामने आया कि अस्पताल द्वारा उपचार के लिए नियुक्त चिकित्सक जिले से बाहर था और मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल में मौजूद नहीं था। इसके बाद सामान्य दो मरीजों को वापस घर भेज दिया गया तथा जो गंभीर रूप से ग्रसित मरीज थे उन्हें उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग को यह भी जानकारी मिली कि 25 अगस्त को तीन मरीजों का डायलिसिस बिना जिम्मेदार चिकित्सक की मौजूदगी के किया गया।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलका तिवारी ने बताया कि शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की है। चिकित्सकीय सेवाओं में निर्धारित मानकों का पालन नहीं पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अस्पताल को बंद कर सील कर दिया गया।
