
उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति आगे बढ़ती है तो उसके साथ परिवार, समाज और पूरा देश आगे बढ़ता है। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिले और प्रत्येक महिला आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़े। उन्होंने सम्मानित महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि इन महिलाओं ने अपने परिश्रम, प्रतिभा, साहस और संकल्प से विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रही हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं। श्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई देते हुए कहा कि महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
आयोग को गांवों, कस्बों तथा जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर महिलाओं को उनके कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि आयोग पीड़ित महिलाओं को न्याय और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में प्रभावी भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नारी शक्ति को नयी पहचान, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर मिले हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने बेटियों के प्रति सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर उनका आसीन होना नारी शक्ति के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।
श्री साय ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की सबसे मजबूत नींव आर्थिक स्वावलंबन है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है और योजना की 31 किस्तें महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह सहायता महिलाओं के आत्मसम्मान और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बनी है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, कृषि, वनोपज आधारित गतिविधियों, लघु उद्योग और स्वरोजगार के साथ ड्रोन संचालन जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देने के साथ महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत प्रदेश में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गयी है।
