
इटारसी। रक्षाबंधन के अगले दिन शनिवार शाम अंचल में लोक परंपरा और भाईचारे का प्रतीक भुजलिया पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। हरियाली और अच्छी फसल की कामना से जुड़े इस पर्व पर लोगों ने एक-दूसरे को भुजलिया भेंट कर सुख-समृद्धि की शुभकामनाएं दीं।
पर्व की शुरुआत घरों में स्थापित भुजलिया की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पूजा करने के बाद भुजलिया को विसर्जन के लिए स्थानीय नदियों और जलस्रोतों तक पहुंचाया। सोना सावरी नाका क्षेत्र और मेहरा गांव की नदी के घाटों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने श्रद्धा के साथ भुजलिया के दोने नदी में प्रवाहित किए।
विसर्जन के बाद श्रद्धालुओं ने स्थानीय मंदिरों में पहुंचकर देवी-देवताओं को भुजलिया अर्पित की और क्षेत्र की सुख-शांति की कामना की। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को भुजलिया भेंट कर पर्व की बधाई दी और सामाजिक मिलन का सिलसिला शुरू हुआ।
शोक संतप्त परिवारों को भी पर्व में किया शामिल
भुजलिया पर्व के दौरान सामाजिक संवेदना की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली। लोगों ने हाल ही में किसी परिजन को खो चुके गमी वाले परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें भी भुजलिया भेंट की। इस तरह उन्हें पर्व में शामिल करते हुए समाज ने आपसी प्रेम, भाईचारे और संवेदना का संदेश दिया।
देर शाम तक नदी घाटों और चौक-चौराहों पर भुजलिया मिलन का उत्साह बना रहा। पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि लोक परंपराएं केवल धार्मिक रस्में नहीं, बल्कि समाज को आपसी प्रेम और सद्भाव के सूत्र में बांधने का माध्यम भी हैं।
