पुणे, 22 अगस्त (वार्ता) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को यहां कहा कि हमारा लक्ष्य महिलाओं को पितृसत्ता के पिंजरे से मुक्त करना और उन्हें उनका उचित सम्मान दिलाना है
श्री गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं, खासकर युवतियां देश का भविष्य हैं और उन्हें पितृसत्तात्मक सोच के कारण लगाए गये प्रतिबंधों से मुक्त किया जाना चाहिए। समाज में गहराई तक जड़ जमा चुकी पितृसत्तात्मक सोच के कारण महिलाओं को ऐतिहासिक रूप से नियंत्रित करने के प्रयास किए जाते रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी सोच के साथ-साथ मनुस्मृति पर आधारित व्याख्याओं ने महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दिया है। इसके कारण शारीरिक हिंसा, यौन शोषण, सामाजिक प्रतिबंध, अवसरों से वंचित करना और सुरक्षा की कमी जैसी समस्याएं पैदा हुई हैं।
उन्होंने महिलाओं के सामने मौजूद चुनौतियों को बताने के लिए कई आंकड़ों का उल्लेख किया। श्री गांधी ने कहा कि लगभग 60 प्रतिशत लड़कियों और महिलाओं को अकेले बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है, जबकि 45 प्रतिशत लड़कियों को शादी या घर की जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई या नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि केवल आठ प्रतिशत महिलाओं के नाम पर संपत्ति है और लगभग 85 प्रतिशत महिलाओं को नौकरी करने या व्यवसाय शुरू करने के लिए परिवार की अनुमति की जरूरत होती है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि महिलाओं से अक्सर उम्मीद की जाती है कि वे अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने परिवार को दें। उन्होंने दावा किया कि यौन उत्पीड़न के लगभग 99 प्रतिशत मामले सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और न्याय मिलने की अनिश्चितता के कारण दर्ज ही नहीं होते।
घर के काम की असमान जिम्मेदारी को उजागर करते हुए श्री गांधी ने कहा कि 15 से 29 वर्ष की उम्र की लड़कियां औसतन हर दिन लगभग साढ़े पांच घंटे घर का काम करती हैं, जबकि लड़के ऐसे कामों में केवल लगभग आधा घंटा लगाते हैं।
उन्होंने कहा कि लड़कों को पढ़ाई में असफल होने के बाद भी अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए आमतौर पर बार-बार अवसर दिए जाते हैं, जबकि लड़कियों से अक्सर शादी या घर की जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई छोड़ने के लिए कहा जाता है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत और महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा से संबंधित अन्य नेताओं के कथित बयानों का भी उल्लेख किया।
श्री गांधी ने कहा, “आज महिलाएं बुद्धिमान और सक्षम हैं। वे सम्मान की हकदार हैं और उनके मन से डर को दूर किया जाना चाहिए। वे देश का भविष्य बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं।”
कार्यक्रम में लड़कियों की काफी भागीदारी देखने को मिली, जिसमें खास तौर पर बड़ी संख्या में युवा महिलाएं मौजूद थीं। कई महिलाएं मंच पर आईं और उन्होंने वहां मौजूद लोगों के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए।
एक युवा महिला (जिसने कथित तौर पर सांप के काटने से छात्रावास के तीन आदिवासी विद्यार्थियों की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था) ने भी श्री गांधी का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। श्री गांधी ने चल रहे भूख हड़ताल स्थल पर जाने की इच्छा जताई।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। युवतियों ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइटें जलाईं और उन्हें हवा में लहराते हुए श्री गांधी को विदाई दी। भोजपुरी के एक गायिका की प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में रहीं। उन्होंने दो ऐसे गीत प्रस्तुत किए, जिनमें मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए गये।
