
बागली। विश्व की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तक रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्मोत्सव बागली संस्कृत शाला में उन्हें याद करते हुए मनाया इस दौरान पंडित ओमप्रकाश त्रिवेदी सुनील दत्त जोशी एवं विशेष अतिथि शिक्षक प्रकाश व्यास कासम अली सुनील योगी रहे। वक्ता के रूप में पंडित ओमप्रकाश त्रिवेदी ने तुलसी दास जी के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि तुलसीदास जी द्वारा रामचरित मानस को सरल अवध भाषा में प्रकाशित कर इसे आम जनता तक पहुंचाने का उत्कृष्ट कार्य किया इसके पूर्व यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में था। अन्य वक्ता के रूप में शिक्षक सुनील दत्त जोशी ने तुलसीकृत रामायण के दोहों की चर्चा करते हुए बताएं कि प्रत्येक दोहा अपने आप में एक ग्रंथ है जिससे कई कहानी और विवरण सुनाया जा सकता है कालांतर कथा करो ने एक-एक दोहे पर लंबे समय तक वक्त में देकर इसकी महिमा को बताया है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए पंडित राकेश नागौरी ने बताया कि 1995 से लगातार संस्कृत विद्यालय में तुलसी जन्म महोत्सव मनाया जा रहा है। रामचरित मानस को साक्षात शिव पार्वती हस्ताक्षरित ग्रंथ बताते हुए कहा कि जहां भी राम की चर्चा होती है वहां हनुमान रहते हैं और जहां हनुमान की चर्चा होती है वहां गोस्वामी तुलसी दास को याद किया जाता है। आज भी चातुर्मास के दौरान कई घरों में रामचरितमानस का पाठ होता है। अन्य वक्ताओं ने भी तुलसीदास जी की अन्य पुस्तकों पर चर्चा करते हुए बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भारत में फिर से सनातन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई अतिथि वक्ता के रूप में पत्रकार सुनिल योगी ने बताया की रामराज की कल्पना तभी की जा सकती है जब रामकाज उचित रूप से हो। कहने का तात्पर्य भगवान को याद करना सरल है ।लेकिन उनकी बातों को अमल में लाना थोड़ा कठिन है। तुलसीकृत रामायण पढ़ने के साथ-साथ उसे समझाना भी बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संस्कृत शाला के छात्र उपस्थित रहे सभी अतिथियों ने गोस्वामी तुलसीदास जी को नमन करते हुए प्रण लिया कि वह दिन में एक बार तुलसी कृत चौपाईयो का अध्ययन जरूर करेंगे
