
छिंदवाड़ा। स्वास्थ्य विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासकीय सेवा में लाभ लेने के आरोपों की जांच अब संभागीय स्तर पर शुरू हो गई है। बुधवार को संभागीय अधिकारियों की टीम शिकायत की जांच के लिए सीएमएचओ कार्यालय पहुंची। टीम ने डॉ. अजीत से करीब एक घंटे तक पूछताछ की और नियुक्ति सहित अन्य दस्तावेजों की जानकारी ली। इसके बाद शिकायतकर्ता के भी बयान दर्ज किए गए। वही डॉ पूर्वसीएमएचओ डॉ नरेष गुन्नाड़े मौजूद नहीं होने के कारण उनसे पूछताछ नहीं हो पाई है। जांच टीम में क्षेत्रीय संचालक मनोज बुनकर, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सालेवार और लेखाधिकारी डॉ. प्रेमशंकर झारिया शामिल रहे। अधिकारियों ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित दस्तावेज और अभिलेखों की जानकारी जुटाई। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिकायत कर्ता ने कहा है यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो मामले को आगे ले जाया जाएगा।
डॉ. नरेश और डॉ. जितेश पर गंभीर आरोप ००००००००
मामले में प्रभारी सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाड़े और उनके पुत्र डॉ. जितेश गुन्नाड़े के खिलाफ कथित रूप से फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ लेने की शिकायत की गई थी। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश पोंफली ने कलेक्टर को दस्तावेजों के साथ शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत के अनुसार डॉ. जितेश की नियुक्ति वर्ष 2023 की एमपीपीएससी परीक्षा के माध्यम से मेडिकल ऑफिसर पद पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी में हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके पिता डॉ. नरेश गुन्नाड़े का शासकीय वेतन करीब 19 लाख रुपये वार्षिक से अधिक है। इसके बावजूद कथित रूप से आय छिपाकर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र हासिल किया गया।
एसटी के बाद ईडब्ल्यूएस का लाभ लेने का आरोप ००००००
षिकायत कर्ता ने बताया कि कि डॉ. नरेश गुन्नाड़े वर्ष 1988 से एसटी-हलबा वर्ग के तहत शासकीय सेवा में हैं और इसी आधार पर पदोन्नति का लाभ लेते रहे हैं। वहीं डॉ. जितेश पर वर्ष 2011-12 में व्यापमंध्डीएमईटी की प्रवेश प्रक्रिया में एसटी वर्ग का लाभ लेने के बाद शासकीय नौकरी में ईडब्ल्यूएस श्रेणी अपनाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने दोनों के मूल सेवा अभिलेख, नियुक्ति संबंधी दस्तावेज तथा आय और जाति प्रमाण पत्र जब्त कर जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित आय प्रमाण पत्र जारी करने वाले राजस्व अधिकारी की भूमिका की जांच और निष्पक्ष जांच तक संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की गई है।
