आदिवासी गांवों में मलाजखंड कॉपर प्रोजेक्ट बढ़ा रहा बीमारी

बालाघाट, जिले के बैहर बिरसा ब्लाकों आदिवासी गांवों में फैले संक्रमण और बच्चों की मौतों की गूंज देश-प्रदेश में हो रही है । संक्रामक और त्वचा रोग की बीमारी वर्षो से आदिवासियों की जान की दुश्मन बनी हुई है। जो थोड़ी बहुत कमी थी वह पूर्ति मलाजखण्ड ताम्र परियोजना मलाजखंड पूरी कर देता है, जिसके दूषित और केमिकल युक्त पानी से बोरखेड़ा और छिंदीटोला गांव अतिप्रभावित है। आदिवासियों के अधिकतर घर में त्वचा रोग और गंभीर संक्रमण से पीडि़त मरीज है। इसके केमिकल युक्त प्रदूषित पानी से किसान खेती जीव जंतु के साथ पर्यावरण पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है । कहने को तो एचसीएल ने इन गांवों का विकास करने गोद लिया है लेकिन दूषित पानी का दर्द काफी बड़ा है। रोजगार का संकट है क्योंकि इसी विषैले पानी से खेती-किसानी भी चौपट है। संक्रमण की पड़ताल के लिये जब छिंदीटोला गांव की जमीनी स्तर पर जांच की गई तो और भी चौकाने वाली बातें सामने आई है।

 

नारकीय जीवन जीने को मजबूर

छिंदीटोला के ग्रामीण बताते है कि जब ताम्र परियोजना मलाजखण्ड में नहीं थी तब सबकुछ सामान्य था, खेती-किसानी करते और स्वस्थ जीवन जी रहे थे लेकिन परियोजना के विषैले पानी ने अब जीवन में जहर घोल दिया है। उम्मीद थी कि इतनी बड़ी परियोजना क्षेत्र में आई है तो रोजगार मिलेगा लेकिन दूषित जल जान का दुश्मन बन गया है। छिंदीटोला और बोरखेड़ा इस दंश से प्रभावित है और ग्रामीणों का आरोप है कि लम्बे समय से यह समस्या बनी हुई है अब तो हाल यह है कि गांव के हर घर में एक ना एक व्यक्ति त्वचा रोग तथा गंभीर संक्रमण सेे पीडि़त है।

 

बीमारियों का गढ़ बन गया है छिंदीटोला गांव

छिंदीटोला निवासी सनिया वल्के ने बताया कि गांव में पानी पीने से त्वचा रोग की समस्याएं हैं। उनका कहना है कि जब से एचसीएल कंपनी आई है, तब से यह समस्या चली आ रही है। कहने को तो एचसीएल ने छिंदीटोला गांव को गोद लिया है लेकिन यहां विकास कोसो दूर है और बीमारियों का गढ़ गांव बन गया है। स्वास्थ्य शिविर के नाम पर एचसीएल मजाक करता है और एक ही प्रकार की दवाईयां बांट दी जाती है। कभी ग्रामीणों की सुध नहीं ली गई शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती है। ग्रामीण अंतुसिंह मेरावी ने बताया कि दूषित पानी के कारण दमा-खांसी जैसी परेशानी होती है।

 

प्लांट के रसायनिक पानी से फसलें हो गई चौपट

ग्रामीणों ने बताया कि एक समय गांव में अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर थे और पैदावार भी अच्छी होती थी जिससे उन्हें वर्षभर खाने के लिये अनाज एवं दलहन फसलों के साथ ही साग-सब्जी भी मुहैया हो जाती थी लेकिन एचसीएल ने निवाला ही छीन लिया है खराब पानी का असर खेती-किसानी पर भी है और फसलों को यह रसायनिक पानी बर्बाद कर देता है।

 

दूषित पानी से जीव जंतु पर ख़तरा

कॉपर प्लांट से निकलने वाले दूषित पानी से कटी के साथ यह के जीव जंतु जानवर के जीवन पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है । पुर के सालों के पहले कुछ खेती के साथ जंगली जानवरों की भी आकल मौत हो चुकी है ।

 

सांसद भी कर चुकी है दौरा

यहाँ कि गंभीर परिस्थितियों की जानकारी जिले सांसद श्रीमती भारती पारधी को मिली तो उन्होंने उस प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों आदिवासियों से मुलाकात किया उनकी समस्या को सुनकर सम्बंधित कॉपर परियोजना के वरिष्ट अधिकारियों को सुधार करने और समस्या को सुधारने के निर्देश दिए थे लेकिन उनके द्वारा कोई विशेष कार्यवाही इस हेतु नहीं किए गए । जिसका समाचार भी प्रकाश नवभारत अखबार में प्रकाशित किया है ओर इस समाचार से बौखलाकर कॉपर के अधिकारी नवभारत के प्रतिनिधि का फोन भी अब उठाना बंद कर दिया है ओर वाट्सअप में इससे नाराजगी जाहिर किया कि आप न्यूज क्यों लगाते हो ।

 

एचसीएल की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में

ताम्र परियोजना मलाजखण्ड हमेशा से ही छिंदीटोला गांव की दुर्दशा को लेकर सवालों के घेरे में रहता है लेकिन आज तक जिला प्रशासन और एचसीएल के अधिकारियों ने कोई संवेदनशीलता ग्रामीणों के प्रति नहीं दिखाई है। सच है कि मौतें होने पर प्रशासन की नींद टूटती है जैसा कि बिरसा ब्लाक के बैगा आदिवासी गांवों में संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला है यहां पर सरकार के अपने दावे है और विपक्ष के अपने आरोप लेकिन एचसीएल द्वारा दूषित पानी की दी जा रही त्रासदी पर जांच कौन करेगा। पानी के गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण क्यों नहीं कराया जाता है और इन ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था क्यों नहीं दी जाती है। जवाबदारों के द्वारा छिंदीटोला गांव की बर्बादी का तमाशा संक्रमण से होनेवाली मौतों के रूप में देखने की शायद प्रतीक्षा हो रही है तभी तो जांच और कार्यवाही की सभी फाईलें दफन कर दी गई है।

 

इनका कहना है

देवनसिंह मराकाम, ब्लॉक अध्यक्ष भारतीय जनता टे्रड यूनियन काउंसिल का इस संबंध में कहना है कि छिंदीटोला के आदिवासियों को विकास के नाम पर बीमारी और बर्बादी नहीं दी जा सकती। यदि दूषित पानी से ग्रामीणों की सेहत और खेती प्रभावित हो रही है तो यह बेहद गंभीर मामला है। प्रशासन और एचसीएल तत्काल पानी, मिट्टी व फसलों की वैज्ञानिक जांच कराएं। दोष साबित होने पर जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई हो और प्रभावित परिवारों को शुद्ध पानी व उचित राहत मिले।

Next Post

अवैध हथियारों का जखीरा बरामद, हत्याकांड में फरार इनामी शूटर गिरफ्तार

Tue Aug 18 , 2026
जबलपुर। क्राइम ब्रांच ने हत्या और हत्या के प्रयास में लंबे समय से फरार चल रहे इनामी बदमाश शेख आदिल को घातक अवैध हथियारों और कारतूसों के जखीरे के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी लार्डगंज थाना अंतर्गत भूलन बस्ती के एक मकान में छिपकर फरारी काट रहा था, जिसे पुलिस […]

You May Like