
बालाघाट, जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम कुंडेकसा, अडोरी, कोरका, बोंदारी और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और उपचार अभियान तेज कर दिया है। मौसमी बीमारी, सर्दी-खांसी, बुखार, चर्मरोग, मीजल्स, स्कैबीज और मलेरिया जैसे मामलों के सामने आने के बाद विभाग की टीमें लगातार घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं।
16 अगस्त 2026 को जारी दैनिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार अब तक 2,882 लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इनमें विभिन्न बीमारियों से प्रभावित 630 मरीज चिन्हित किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी को हल्के में लेने की गुंजाइश नहीं है।
630 मरीजों में मलेरिया और बुखार के मामले
स्वास्थ्य सर्वे के दौरान 241 मरीज मलेरिया, 127 मरीज दस्त, 102 मरीज दाने के साथ बुखार और 160 मरीज चर्मरोग से पीड़ित पाए गए। इनमें से 461 मरीजों का उपचार घर पर किया गया, जबकि 169 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों में से 125 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 44 मरीजों का उपचार अभी जारी है । 16 अगस्त को उपचार के बाद स्वस्थ हुए 25 बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर उनके घर पहुंचाया गया।
20 सर्वे टीम के साथ 4 एंबुलेंस मैदान में
स्थिति पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में 20 सर्वे टीम, 10 चिकित्सा अधिकारी और 4 एंबुलेंस तैनात की हैं। टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल पहुंचाकर उपचार की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उपचाररत मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है तथा आवश्यकतानुसार दवाएं और चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बच्चों पर विशेष फोकस,
विटामिन-ए से लेकर मीजल्स डोज तक । स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, घुम्मुर, अडोरी, मछुरदा, गठिया और मातला सहित विभिन्न गांवों में स्वास्थ्य सर्वे किया जा रहा है । अभियान के दौरान 658 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक, ओआरएस एवं जिंक टैबलेट, 597 बच्चों को आयरन सिरप, 521 बच्चों को एल्बेंडाजोल की टैबलेट तथा 63 बच्चों को मीजल्स की डोज दी गई।
इसके साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए 8 गांवों में लार्वा सर्वे, 7 गांवों में स्प्रे और 7 गांवों में फॉगिंग कराई गई है।
आंकड़े राहत भी देते हैं, लेकिन सवाल भी छोड़ते हैं
स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से उपचार मिलने और मरीजों के स्वस्थ होने की तस्वीर सामने आती है, लेकिन 2,882 लोगों में 630 मरीज चिन्हित होना प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी की गंभीरता को भी रेखांकित करता है । फिलहाल 44 मरीजों का अस्पताल में उपचार जारी है। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी के स्रोत, संक्रमण के कारणों और संभावित नए मामलों की समय रहते पहचान कर उन्हें रोकना भी है।
जब तक प्रभावित गांवों में लगातार निगरानी, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, मच्छर नियंत्रण और समयबद्ध चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होती, तब तक इन आंकड़ों को महज एक दैनिक सर्वे रिपोर्ट मानकर आगे बढ़ जाना उचित नहीं होगा। ग्रामीण से प्रशासन ने अपील किया है कि क्षेत्र में बुखार, दाने, दस्त, मलेरिया या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सकीय टीम से संपर्क करे ।
