भोपाल। लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई के दौरान भोपाल के जंगल में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद मिलने के चर्चित मामले में आरोपी आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को 18 महीने बाद केंद्रीय जेल भोपाल से रिहा कर दिया गया। बुधवार रात करीब साढ़े 10 बजे जेल प्रशासन ने उसकी रिहाई की पुष्टि की। सौरभ शर्मा 10 फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में था और करीब डेढ़ साल से अधिक समय से जेल में बंद था। मंगलवार को हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए कई शर्तें लगाई थीं। कोर्ट ने निर्देश दिए कि वह बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जा सकेगा, किसी गवाह या साक्ष्य को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा और ट्रायल कोर्ट में प्रत्येक सुनवाई के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहेगा। यह मामला दिसंबर 2024 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान उसके करीबी चेतन गौर की कार भी बरामद की गई थी। आयकर विभाग की जांच में कार से 11 करोड़ रुपये नकद, 52 किलोग्राम सोना और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आई थी।
अदालत परिसर से हुई थी गिरफ्तारी
जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद सौरभ शर्मा लंबे समय तक फरार रहा था। बाद में लोकायुक्त टीम ने उसे अदालत परिसर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह केंद्रीय जेल भोपाल में बंद था। इस प्रकरण में सौरभ शर्मा की पत्नी सहित अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। जांच एजेंसियां मामले में संपत्तियों, लेन-देन और कथित बेनामी निवेश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। सौरभ की रिहाई के बाद अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
