पंचकूला , 04 अगस्त (वार्ता) हरियाणा बिजली नियामक आयोग (एचईआरसी) ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए ऐसे नए नियम लागू किए हैं, जिनके तहत उपभोक्ता अपनी स्वीकृत बिजली लोड (सैंक्शन लोड) को अस्थायी रूप से कम करा सकेंगे और आवश्यकता बढ़ने पर तीन वर्ष के भीतर बिना नए सर्विस कनेक्शन शुल्क के उसे फिर से पूर्व स्तर तक बहाल करा सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मौसमी मांग वाले उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी मानी जा रही है।
आयोग द्वारा 22 जुलाई को अधिसूचित संशोधन हरियाणा सरकार के राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इसके साथ ही आयोग ने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अधिभार (सरचार्ज) के नियमों में भी राहत दी है।
लोड घटाने और दोबारा बढ़ाने पर क्या होगा फायदा
एचईआरसी द्वारा ‘ड्यूटी टू सप्लाई इलेक्ट्रिसिटी ऑन रिक्वेस्ट एंड पावर टू रिकवर एक्सपेंडिचर एंड पावर टू रिक्वायर सिक्योरिटी रेगुलेशंस, 2016’ में किए गए संशोधन के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता अपना स्वीकृत लोड या अनुबंधित मांग कम कराता है तो उसे केवल निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 20,000 रुपये होगी। यह सुविधा तब लागू होगी जब बिजली आपूर्ति के वोल्टेज स्तर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
यदि लोड कम करने के साथ हाई टेंशन (एचटी) से लो टेंशन (एलटी) आपूर्ति में बदलाव होता है, तो उपभोक्ता के पास दो विकल्प होंगे। वह 11 केवी मीटरिंग जारी रखते हुए केवल प्रोसेसिंग शुल्क देकर सुविधा ले सकता है या एलटी मीटरिंग अपनाकर नियमानुसार सर्विस कनेक्शन शुल्क जमा कर सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि उपभोक्ता तीन वर्ष के भीतर अपना लोड पहले के स्वीकृत स्तर तक दोबारा बढ़ाना चाहता है तो उसे कोई नया सर्विस कनेक्शन शुल्क नहीं देना होगा। यदि बहाली तीन वर्ष बाद कराई जाती है तो इसे नया आवेदन माना जाएगा और सामान्य शुल्क लागू होंगे।
यदि कोई उपभोक्ता तीन वर्ष के भीतर पहले से अधिक लोड लेना चाहता है, तो उसे केवल अतिरिक्त लोड के लिए ही शुल्क देना होगा। हालांकि मीटर या अन्य उपकरण बदलने का खर्च उसे स्वयं वहन करना होगा।
कुछ शर्तें भी लागू रहेंगी
आयोग ने इस सुविधा के दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। तीन वर्ष की अवधि में केवल एक बार लोड कम और एक बार लोड बहाल कराया जा सकेगा। प्रत्येक बदलाव के बीच कम से कम छह महीने का अंतर होना आवश्यक होगा।
लोड बहाल करने से पहले बिजली वितरण कंपनी यह प्रमाणित करेगी कि स्थानीय वितरण प्रणाली में पर्याप्त क्षमता उपलब्ध है। जिन उपभोक्ताओं पर बिजली बिल बकाया है या जिनके खिलाफ बिजली चोरी अथवा अनधिकृत उपयोग के मामले लंबित हैं, उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।
एचईआरसी ने ‘इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड रेगुलेशंस, 2014’ में भी संशोधन करते हुए स्वीकृत अनुबंधित मांग से अधिक बिजली उपयोग करने पर लगने वाले अधिभार के नियम आसान कर दिए हैं।
अब यदि किसी उपभोक्ता की मासिक अधिकतम मांग स्वीकृत लोड से 10 प्रतिशत तक अधिक रहती है, तो उस पर कोई सरचार्ज नहीं लगेगा।
यदि अतिरिक्त मांग 10 से 15 प्रतिशत के बीच होती है, तो 20 प्रतिशत सरचार्ज लगाया जाएगा। वहीं 15 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त मांग होने पर 25 प्रतिशत सरचार्ज या आयोग द्वारा समय-समय पर निर्धारित दर लागू होगी।
इन संशोधित नियमों से विशेष रूप से उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और ऐसे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी बिजली की मांग मौसम या कारोबार के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है। नए प्रावधान उन्हें बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिजली लोड का बेहतर प्रबंधन करने की सुविधा देंगे।
