नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर को राष्ट्रीय प्राथमिकता देने की मांग

जबलपुर: महाकौशल एवं आदिवासी अंचल के रेल विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा को उनके जबलपुर स्थित निवास पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन के नेतृत्व में क्षेत्रीय प्रतिनिधियों द्वारा सौंपा गया, जिसमें मंडला जिले सहित पूरे महाकौशल क्षेत्र की वर्षों पुरानी रेल परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति दिलाने और उन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकता में शामिल करने की मांग की गई। यह पहल नारायण सिंह पट्टा के विशेष प्रयासों एवं समन्वय से संपन्न हुई। इस दौरान निवास विधानसभा क्षेत्र के विधायक चैनसिंह वरकड़े तथा नित्य भारत समाचार पत्र के प्रधान संपादक भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से आग्रह किया कि इन जनहित के मुद्दों को राज्यसभा में विशेष उल्लेख अथवा शून्यकाल के माध्यम से प्रमुखता से उठाया जाए, ताकि लंबे समय से लंबित रेल परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति मिल सके।ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग नर्मदा-मैकलसुता भोरमदेव रेल कॉरिडोर को लेकर रखी गई। बिलासपुर–पंडरिया–मंडला–ग्वारीघाट के बीच लगभग 230 किलोमीटर के मिसिंग लिंक के लिए तत्काल अपडेटेड ट्रैफिक सर्वे स्वीकृत करने का आग्रह किया गया।

साथ ही इस परियोजना को कटघोरा–उसलापुर–तखतपुर–मुंगेली–कवर्धा–डोंगरगढ़ रेल परियोजना के साथ समेकित कर राष्ट्रीय महत्व का रेल कॉरिडोर घोषित करने की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर के तहत पेंड्रा–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–गोरेगांव रेल परियोजना के लिए शीघ्र फाइनल लोकेशन सर्वे की स्वीकृति प्रदान कर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने का अनुरोध किया गया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने से मध्य भारत में रेल संपर्क का नया अध्याय शुरू होगा।
पमरे में शामिल हो मंडला, नैनपुर
ज्ञापन में पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर जोन के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने यात्रियों की सुविधा, बेहतर रेल संचालन और प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन और नैनपुर जंक्शन को पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर जोन के अंतर्गत शामिल करने की मांग की। साथ ही मंडला फोर्ट स्टेशन को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कोचिंग टर्मिनल के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया, ताकि भविष्य में लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन सुगमता से किया जा सके। ज्ञापन में कहा गया कि इससे मंडला, डिंडोरी, बालाघाट तथा आसपास के जिलों के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र में रेल सेवाओं का विस्तार तेजी से हो सकेगा।
आदिवासी अंचल का होगा विकास
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ये रेल परियोजनाएं केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आदिवासी अंचलों के सामाजिक-आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, पर्यटन संवर्धन और क्षेत्रीय संतुलित विकास की आधारशिला साबित होंगी। अमरकंटक, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, भोरमदेव, भेड़ाघाट, रतनपुर सहित अनेक धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को बेहतर रेल संपर्क मिलने से पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी रेल एक्टिविस्ट ने विश्वास जताया कि राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा इस महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे को संसद में पूरी मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता की अपेक्षा है कि नर्मदा-मैकलसुता भोरमदेव और नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर परियोजनाओं के सर्वे एवं स्वीकृति की प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो तथा मंडला फोर्ट और नैनपुर जंक्शन को पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर जोन में शामिल कर मंडला फोर्ट को विकसित कोचिंग टर्मिनल का दर्जा प्रदान किया जाए, जिससे महाकौशल के विकास को नई गति मिल सके।

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